SCHOOL, CHILDREN, MANTRI : स्कूली छात्रों को कूटनीतिक सफलता के नुस्खे सिखाने की तैयारी

SCHOOL, CHILDREN : स्कूली छात्रों को कूटनीतिक सफलता के नुस्खे सिखाने की तैयारी

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली: विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कूटनीति को आम जनता से जोड़ने की जो पहल शुरु की है उसका दूसरा चरण जल्द ही हमें पूरे देश में देखने को मिलेगा। इसके तहत भारतीय विदेश मंत्रालय के कूटनीतिकारों को आप गांवों के स्कूलों और कालेजों में छात्रों के बीच पाएंगे। ये अधिकारी इन शिक्षण संस्थानों में छात्रों को न सिर्फ कूटनीति के तमाम पहलुओं से वाकिफ करवाएंगे बल्कि उन्हें हाल के दिनों में कूटनीतिक मोर्चे पर भारत को मिली तमाम सफलताओं के बारे में भी जानकारी देंगे।

मकसद यह है कि कूटनीति को ज्यादा से ज्यादा आम जनता से जोड़ा जाए। लेकिन जानकार यह भी मान रहे हैं कि इससे राजनीति की राह भी आसान होगी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने दैनिक जागरण को बताया कि, आम जनता तक अपनी नीतियों को पहुंचाने के लिए विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से बेहतर और कोई दूसरा नहीं हो सकता। लेकिन अधिकारियों पर कोई दबाव नहीं होगा। उन्हें स्वैच्छिक तौर पर इस कार्यक्त्रम में योगदान देना होगा। सबसे बड़ी बात यह है कि इस कार्यक्त्रम को लेकर अधिकारियों में काफी उत्साह है और बड़ी संख्या में अधिकारी इसमें हिस्सा लेने को तैयार हैं।

इसके जरिए उन्हें अपने गांव या शहर के स्कूल से जुड़ने का मौका मिलेगा। वैसे कार्यक्त्रम का नाम अभी तय नहीं किया गया है। इसके लिए आम जनता से सुझाव मांगे गये हैं जो वे मायगोव डॉट इन पर भेज सकते हैं।

सनद रहे कि पिछले साढ़े तीन वषरें में विदेश मंत्रालय के कार्यकलाप को जिस तरह से आम जनता के बीच जोड़ा गया है वैसा उदाहरण पहले कभी देखने को नहीं मिला है। पीएम नरेंद्र मोदी के स्तर पर ही इसकी शुरुआत हुई है। हर विदेश दौरे के वक्त वह जिस तरह से बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोगों से मिलते हैं वह इसी कोशिश का नतीजा है। इसी तरह से दुनिया भर में फैले भारतीय दूतावासों, उच्चायोगों या अन्य केंद्रों को खास निर्देश दिया गया है कि वे भारतीय मूल के लोगों की समस्याओं को खास तवज्जो दे।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज स्वयं ही बाहर गये भारतीयों की समस्याओं को सुलझाने में व्यक्तिगत रुचि दिखाती हैं। ट्रिवटर के जरिए वह सिर्फ भारतीयों के ही नहीं बल्कि विदेशी नागरिकों की भी मदद कर रही हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से पूछिए नाम से ट्विटर पर सेवा शुरु की गई है जिसमें विदेश नीति से जुड़े कोई भी सवाल पूछे जा सकते हैं।

बहरहाल, स्कूल व कालेजों में जाने वाले भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों को एक प्रेजेंटेशन तैयार करके दिया जाएगा लेकिन वहां चर्चा के दौरान इन अधिकारियों को अपने अनुभव साझा करने की छूट होगी। मसलन, अमेरिका में भारतीय दूतावास में अपनी सेवा दे चुके अधिकारी को यह छूट होगी कि वह स्कूली छात्रों को भारत व अमेरिका के द्विपक्षीय रिश्तों के बदलते आयाम के बारे में बताये।

इससे छोटी उम्र से ही भारतीय विद्यार्थियों को कूटनीति की अहमियत में समझ आएगी और वह यह जान पाएंगे कि देश के विकास में विदेश मंत्रालय की भी अहम भूमिका होती है। यह आम जनता में विदेश मंत्रालय की पारंपरिक छवि को तोड़ने में भी मदद करेगा।
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