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SHIKSHAMITRA, EXAMINATION : सिर्फ टीईटी पास के बूते सहायक अध्यापक नहीं बन सकेंगे शिक्षामित्र, दो सौ अंकों की परीक्षा पास करने पर ही होंगे नियमित

SHIKSHAMITRA, EXAMINATION : सिर्फ टीईटी पास के बूते सहायक अध्यापक नहीं बन सकेंगे शिक्षामित्र, दो सौ अंकों की परीक्षा पास करने पर ही होंगे नियमित

अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद । शिक्षामित्रों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के लिए भले आवेदन कर दिया हो, लेकिन सिर्फ इस परीक्षा के बूते वे परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक नहीं बन सकेंगे। टीईटी के बाद उन्हें राज्य स्तर पर होने वाली दो सौ अंकों की लिखित परीक्षा भी पास करनी होगी। उसके बाद ही वे सहायक अध्यापक बन सकेंगे। हालांकि सरकार ने शिक्षामित्रों को निर्धारित आयु सीमा में छूट तथा शिक्षण अनुभव का भरांक (वेटज) देने का भी निर्णय लिया है लेकिन नियुक्ति के पहले लिखित परीक्षा कराने के सरकार के इस फैसले से शिक्षामित्रों के सामने संकट खड़ा हो सकता है।

सर्वोच्च अदालत से समायोजन रद्द होने के बाद प्रदेश सरकार यह निर्णय ले चुकी है कि शिक्षामित्रों को यदि उनके द्वारा एनसीटीई से निर्धारित न्यूनतम अर्हता धारित कर ली जाती है तो आगामी दो क्रमिक भर्तियों में सहायक अध्यापक के रिक्त पद पर सीधी भर्ती के माध्यम से नियुक्ति के लिए अवसर उपलब्ध दिया जाएगा। साथ ही उन्हें निर्धारित आयु सीमा में छूट तथा शिक्षण अनुभव का भारांक भी प्रदान किया जाएगा। भारांक के रूप में 2.5 अंक प्रत्येक पूर्ण शिक्षण वर्ष के अनुभव पर अधिकतम 25 अंकों तक दिया जाएगा लेकिन इसके साथ उन्हें लिखित परीक्षा भी देनी होगी। इसमें स्नातक, प्रशिक्षित तथा टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थी ही शामिल हो सकेंगे। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद संजय सिन्हा का कहना है कि कैबिनेट के फैसले के बाद शासनादेश होना है। अब उसी का इंतजार किया जा रहा है।

सरकार ने प्राथमिक शिक्षक पद के लिए जिस लिखित परीक्षा कराने का निर्णय लिया है, वह दो सौ अंकों की होगी। ढाई घंटे की इस परीक्षा में सभी प्रश्न एक-एक नंबर के होंगे। भाग-1 में तर्कशक्ति के 20, भाग-2 में सामान्य ज्ञान के 40, भाग-3 में सामान्य अंग्रेजी और हिंदी (प्रत्येक विषय में 30 अंक) के 60, भाग-4 संख्यात्मक योग्यता के 20 तथा भाग-5 में शिक्षण अभिरुचि के 60 प्रश्न पूछे जाएंगे।

समायोजन रद्द होने के बाद माना जा रहा था कि जो शिक्षामित्र टीईटी पास हैं, उनके नियमितीकरण में किसी तरह की अड़चन नहीं आएगी लेकिन अब उन्हें भी राज्य स्तर की लिखित परीक्षा में शामिल होना पड़ेगा। जिन 1.37 लाख शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द हुआ, उनमें से करीब 20 हजार पूर्व में ही टीईटी उत्तीर्ण कर चुके हैं, सरकार के इस फैसले के बाद उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है।

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