Saturday, September 30, 2017

TEACHING QUALITY, RTE : ताकि ज्यादा सीख और समझ सकें बच्चे , इसलिये कक्षावार सीखने-समझने के अपेक्षित स्तर (लर्निंग आउटकम्स) में सुधार की दिशा में बेसिक शिक्षा विभाग ने कदम बढ़ाये ।

TEACHING QUALITY, RTE : ताकि ज्यादा सीख और समझ सकें बच्चे , इसलिये कक्षावार सीखने-समझने के अपेक्षित स्तर (लर्निंग आउटकम्स) में सुधार की दिशा में बेसिक शिक्षा विभाग ने कदम बढ़ाये ।

लखनऊ : परिषदीय स्कूलों में बच्चों के कक्षावार सीखने-समझने के अपेक्षित स्तर (लर्निंग आउटकम्स) में सुधार की दिशा में बेसिक शिक्षा विभाग ने कदम बढ़ा दिए हैं। न सिर्फ शिक्षकों से क्लासरूम की पढ़ाई पर ज्यादा फोकस करने के लिए कहा गया है, बल्कि बच्चों को बहुविकल्पीय प्रश्नों का उत्तर देने में भी दक्ष बनाने पर जोर दिया जाएगा।

हाल ही में योगी सरकार ने परिषदीय स्कूलों के बच्चों के लर्निंग आउटकम्स को निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमावली में शामिल करने का फैसला किया है। बेसिक शिक्षा निदेशक सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने इस सिलसिले में सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को निर्देश जारी किया है।

सभी बीएसए से कहा गया है कि वे खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से सभी प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को क्लासरूम की पढ़ाई पर अधिक समय देने के साथ बच्चों को सिखाने समझाने पर जोर देने का निर्देश दें। क्लासरूम की पढ़ाई में सामग्री तथा गतिविधियों का प्रयोग करने के लिए कहा गया है। बच्चों को पढ़ाने के लिए विविधतापूर्ण तरीके आजमाने पर बल दिया गया है।

ONLINE SYSTEM, MOBILE, BASIC SHIKSHA PARISHAD : अब नवाचारों का होगा गुणगान, सोशल मीडिया और इंटरनेट के इस्तेमाल के प्रयोग की सलाह, बेसिक शिक्षा परिषद ने दी सभी बीएसए को सलाह।

ONLINE SYSTEM, MOBILE, BASIC SHIKSHA PARISHAD : अब नवाचारों का होगा गुणगान, सोशल मीडिया और इंटरनेट के इस्तेमाल के प्रयोग की सलाह, बेसिक शिक्षा परिषद ने दी सभी बीएसए को सलाह

इलाहाबाद : सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में हो रहे अच्छे काम और नवाचार का प्रचार-प्रसार अब सोशल मीडिया के माध्यम से किया जाएगा। स्मार्टफोन के जमाने में स्कूलों की छवि सुधारने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया का सहारा लेने को कदम बढ़ाया है।

सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को 18 सितंबर को पत्र लिखकर निर्देशित किया है कि अपने जनपदों में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों के प्रचार-प्रसार में सोशल साइट्स तथा मीडिया का उपयोग करें जिससे बेसिक शिक्षा में हो रहे अच्छे कार्यों की जानकारी समाज तथा शिक्षा जगत को हो सके।सचिव ने लिखा है कि प्रत्येक जनपद में बेसिक शिक्षा में ऐसे कार्य किए जा रहे हैं जो अपनी विशेषता के कारण प्रशंसनीय तथा अनुकरणीय है। सोशल साइट्स के सकारात्मक उपयोग से बेसिक शिक्षा में हो रहे उत्कृष्ट कार्यों एवं नवाचारों का प्रचार-प्रसार किया जा सकता है।

SCHOOL, SANITATION, TOILET : गांधी जयंती पर पंचायती राज विभाग परिषदीय शिक्षकों को स्वच्छता के प्रति जागरूकता से जुड़े संदेश भेजेगा, बच्चों से होगी इन मुद्दों पर चर्चा

SCHOOL, SANITATION, TOILET : गांधी जयंती पर पंचायती राज विभाग परिषदीय शिक्षकों को स्वच्छता के प्रति जागरूकता से जुड़े संदेश भेजेगा, बच्चों से होगी इन मुद्दों पर चर्चा

लखनऊ : गांधी जयंती पर पंचायती राज विभाग प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को स्वच्छता के प्रति जागरूकता से जुड़े संदेश भेजेगा। शिक्षकों से अपेक्षा की गई है कि वे इन संदेशों के बारे में विद्यालय में बच्चों से चर्चा करें।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के मिशन निदेशक विजय किरन आनंद जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश भेजे हैं। उन्होंने कहा कि 1.67 लाख प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों तक संदेश पहुंचेंगे। उनसे अपेक्षा है कि अलग-अलग तिथि पर बच्चों और उनके अभिभावकों से संवाद करें। 2 अक्टूबर को स्वच्छ व्यवहार, 6 को हाथ-धुलाई, 16 और 23 को स्वच्छ विद्यालय, 27 अक्टूबर को सुरक्षित और स्वच्छ जल सहित दूसरे विषयों पर चर्चा शामिल है।

📌 👇 आदेश क्लिक करके यहां नीचे देखें :- 👇👇

📌 CIRCULAR, MOBILE, SMS : दिनांक 2 अक्टूबर 2017 से बापू के स्वच्छता मंत्र के अन्तर्गत परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों/नोडल अध्यापकों को विभिन्न अवसरों पर स्वच्छता से संबंधित समूह एसएमएस (Bulk SMS) भेजे जाने के संबंध में आदेश जारी ।

SHIKSHAMITRA, UPTET : टेट पास शिक्षामित्रों ने सुप्रीमकोर्ट में में दाखिल की रिव्यू पिटिशन, भर्तियों को समयबद्ध तरीके से किए जाने और तब तक टीईटी पास शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक पद पर बने रहने की छूट देने की मांग ।

SHIKSHAMITRA, UPTET : टेट पास शिक्षामित्रों ने सुप्रीमकोर्ट में में दाखिल की रिव्यू पिटिशन, भर्तियों को समयबद्ध तरीके से किए जाने और तब तक टीईटी पास शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक पद पर बने रहने की छूट देने की मांग

नई दिल्ली : टीईटी पास शिक्षा मित्रों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दाखिल की गई है। शिक्षा मित्रों का समायोजन रद करने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में सही ठहराया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि जो शिक्षामित्र टीईटी पास हैं या भविष्य में पास कर लेते हैं, उन पर राज्य सरकार सहायक टीचर की लगातार दो भर्तियों में विचार कर सकती है।

याचिकाकर्ता के वकील मीनेश दूबे ने बताया कि टीईटी की मान्यता 5 साल होती है। अगर दो लगातार भर्तियां पांच साल में नहीं हुईं तो टीईटी पास शिक्षामित्रों को भी यह परीक्षा फिर पास करनी होगी। इस याचिका में इन दोनों भर्तियों को समयबद्ध तरीके से किए जाने और तब तक टीईटी पास शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक पद पर बने रहने की छूट देने की मांग की गई है।

DELED, GOVERNMENT ORDER, IMPORTANT, TRAINING : प्रदेश के शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में कार्यरत अप्रशिक्षित अध्यापकों को N.I.O.S. के माध्यम से डी0एल0एड प्रशिक्षण के संबंध में भारत सरकार व बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा जारी आदेश देखें ।

DELED, GOVERNMENT ORDER, IMPORTANT,  TRAINING : प्रदेश के शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में कार्यरत अप्रशिक्षित अध्यापकों को N.I.O.S. के माध्यम से डी0एल0एड प्रशिक्षण के संबंध में भारत सरकारबेसिक शिक्षा परिषद द्वारा जारी आदेश देखें ।





GOVERNMENT ORDER, MRITAK ASHRIT, UNTRAINED : परिषदीय विद्यालयों में नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षकों को 5 वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर प्रशिक्षित वेतनमान देने तथा उसके उपरान्त यथाशीघ्र प्रशिक्षण पूर्ण कराने हेतु जारी शासनादेश दिनांक 24 अप्रैल 2002 देखने हेतु यहाँ क्लिक करें ।








डीएलएड करने वालों को देना होगा Rs.1500 डीटीएच शुल्क


अभी तक घर में नाटक और टीवी देखने के लिए डीटीएच खरीदना पड़ता है लेकिन अब डीएलएड करने के लिए भी इसे खरीदना पड़ेगा क्योंकि डीटीएच के चैनल पर पाठ्यक्रम का प्रसारण होगा। इस आधार पर तैयारी हो सकेगी।


सरकार ने 1 अप्रैल 2019 से स्कूलों में पढ़ाने के लिए डीएलएड अनिवार्य कर दिया है। इसके बाद कोई भी शिक्षक बगैर डीएलएड के स्कूलों में नहीं पढ़ा सकेगा। निजी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को भारी भरकम फीस नहीं चुकाना पड़े, इसलिए सरकार खुद शिक्षकों को एनआईओएस (राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान) से डीएलएड करवा रही है। इसकी कुल फीस 6000 रुपए है। इसमें 4500 रुपए फीस है और 1500 रुपए डीटीएच के लगेंगे।


डीटीएच का शुल्क भी रखने की वजह डीएलएड की तैयारी के लिए स्वयंप्रभा चैनल पर सिलेबस का प्रसारण किया जाएगा। इस आधार पर शिक्षक घर बैठकर इसकी तैयारी कर सकेंगे। इसके बाद इसकी परीक्षा दे सकेंगे।

12वीं में 50% अंक नहीं तो दोबारा देना होगी परीक्षा

डीएलएड के लिए सरकार ने 12वीं में 50 फीसदी अंक होना अनिवार्य कर दिया है। अब वे ही शिक्षक इसमें शामिल हो पाएंगे जिन्होंने इससे ज्यादा अंक हासिल किए हैं अन्यथा उन्हें दोबारा 12वीं की परीक्षा देना होगी। इसके साथ ही वे डीएलएड की भी परीक्षा दे सकेंगे। 12वीं में पास हुए तो डीएलएड में पास माना जाएगा अन्यथा वे 1 अप्रैल 2019 के बाद स्कूलों में नहीं पढ़ा सकेंगे।


आवेदक के घर में डीटीएच है तो भी देना होगी फीस

1. यदि पति-पत्नि शिक्षक हैं और वे डीएलएड करना चाहते हैं तो भी उन्हें 6-6 हजार रुपए चुकाना होंगे जबकि एक ही डीटीएच के जरिए वे तैयारी कर सकते हैं।


2. जिनके घर ब्रॉडबैंड हैं। वे सीधे इसके जरिए भी चैनल देख सकते हैं या ऑनलाइन पढ़ाई कर सकते हैं लेकिन इसके बाद भी उनसे डीटीएच की फीस ली जा रही है।


निजी स्कूल संचालकों को दे रहे ट्रेनिंग


एमपी ऑनलाइन पर डीएलएड के लिए आवेदन हो रहे हैं। इसकी आखिरी तारीख 15 सितंबर है। डीईओ आरके नीखरा ने बताया कि शासकीय एवं अशासकीय स्कूलों के शिक्षकों को जानकारी देने के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं। इसमें उन्हें पूरी जानकारी दी जा रही है। अप्रशिक्षित शिक्षक इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।

कार्यरत अप्रशिक्षित अध्यापकों को डीएलएड प्रशिक्षण योग्यता प्राप्त करने के लिए NIOS के पोर्टल पर नामांकन की अवधि 30 सितम्बर तक बढ़ी : देखें परिषद द्वारा जारी विज्ञप्ति



📌✔✍ सेवारत शिक्षकों के NIOS के माध्यम से डी0एल0एड0 प्रशिक्षण प्राप्त करने से सम्बन्धित सभी प्रश्नों के उत्तर प्राप्त करने हेतु यहाँ देखें ।

📌 क्या परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत सभी शिक्षकों को NIOS के माध्यम से D.El.Ed. करना आवश्यक है?
👉 सभी शिक्षकों के लिए आवश्यक नहीं है। दो वर्षीय बी0टी0सी0 (उर्दू बी0टी0सी भी सम्मिलित) अथवा 6 माह का वि0बी0टी0सी0 प्रशिक्षण प्राप्त कर परिषदीय विद्यालयों में नियुक्त अध्यापकों को यह NIOS प्रशिक्षण प्राप्त करने की कोई आवश्यकता नहीं।
अर्थात बी0टी0सी0 प्रशिक्षण 2001, 2004, 2011, उर्दू बी0टी0सी0-2006 एवं वि0बी0टी0सी0 प्रशिक्षण-1999, 2007, 2008, प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती 2011 , प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती 2012 आदि सीधी भर्ती द्वारा नियुक्त शिक्षकों के लिए यह प्रशिक्षण आवश्यक नहीं है।


📌 परिषदीय विद्यालयों के किन शिक्षकों के लिए आवश्यक है?
👉 मृतक आश्रित के अंतर्गत नियुक्ति प्राप्त अप्रशिक्षित शिक्षक
👉 मोअल्लिम-ए-उर्दू अध्यापक जिन्होंने शासनादेश 11 अगस्त 1997 के बाद उपाधि प्राप्त की हो एवं अभी तक प्रशिक्षित न हुए हों।
👉 सी0पी0एड0 प्रशिक्षण प्राप्त कर नियुक्त शिक्षक
👉 अन्य कोई भी अप्रशिक्षित अध्यापक जिसकी नियमित नियुक्ति की गयी हो।

🔴✍ उपरोक्त वर्णित परिषदीय शिक्षक जो 5 वर्ष सेवा पूर्ण हो जाने के बाद प्रशिक्षित वेतनमान प्राप्त कर रहे हैं लेकिन अभी तक न तो प्रशिक्षण पूर्ण किया है और न ही अपने जनपद की डायट में नामांकन कराया है उनको यह NIOS के माध्यम से डी0एल0एड0 प्रशिक्षण करना बाध्यकारी है अन्यथा 31 मार्च 2019 के बाद वो सेवा में नहीं रह सकेंगे।


📌 परिषदीय शिक्षकों के अतिरिक्त किन शिक्षकों के लिए आवश्यक है?
👉 सभी एडेड जूनियर स्कूल के शिक्षक जो बी0टी0सी0 अथवा समकक्ष प्रशिक्षण प्राप्त नहीं किये हुए हैं एवं जिनकी भर्ती सीधे सम्बन्धित विद्यालय के प्रबंध तंत्र द्वारा की गयी उनको यह NIOS के माध्यम से डी0एल0एड0 प्रशिक्षण करना बाध्यकारी है अन्यथा 31 मार्च 2019 के बाद वो सेवा में नहीं रह सकेंगे।
👉 सभी गैर शासकीय/प्राइवेट विद्यालय के शिक्षक जो बी0टी0सी0 अथवा समकक्ष प्रशिक्षण प्राप्त नहीं किये हुए हैं उन्हें यह प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है। अन्यथा 31 मार्च 2019 के बाद वो शिक्षक के रूप में नियुक्ति प्राप्त करने हेतु अर्ह नहीं होंगे।

📌 इस प्रशिक्षण हेतु न्यूनतम अर्हता क्या है?
👉 इस प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र प्राप्त करने हेतु 12वीं (इंटरमीडिएट परीक्षा) में 50% अंक प्राप्त करना आवश्यक है। यदि किसी शिक्षक के 50% अंक नहीं हैं तो भी वह डी0एल0एड0 कोर्स हेतु नामांकन करा सकता है लेकिन इसके साथ ही उसे 12वीं0 के अंक बढ़ाने हेतु NIOS में नामांकन करना होगा। डी0एल0एड0 का सर्टिफिकेट 12वीं0 में 50% अंक प्राप्त करने के उपरान्त ही मिलेगा।


📌 इस प्रशिक्षण हेतु रजिस्ट्रेशन किस प्रकार किया जाएगा?
👉 सम्बन्धित अप्रशिक्षित शिक्षक को अपने विद्यालय के प्रधानाध्यापक के माध्यम से अथवा स्वयं NIOS के पोर्टल www.nios.ac.in पर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।

📌 रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि क्या है?
👉 रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 30 सितम्बर है।

📌 रजिस्ट्रेशन कराने के बाद क्या कोई फीस भी देनी है?
👉 हाँ, प्रथम वर्ष की फीस 6000 रूपये है जिसमे डिश टीवी के 1500 रूपये शामिल हैं।


EDUCATION SYSTEM : कार्यवाहक अफसर दौड़ाएंगे अब प्रदेश में शिक्षा की गाड़ी, बेसिक, माध्यमिक शिक्षा के लिए कई घोषणाओं को धरातल पर उतारने की चुनौती

EDUCATION SYSTEM : कार्यवाहक अफसर दौड़ाएंगे अब प्रदेश में शिक्षा की गाड़ी, बेसिक, माध्यमिक शिक्षा के लिए कई घोषणाओं को धरातल पर उतारने की चुनौती

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद । बेसिक और माध्यमिक शिक्षा में कई अहम घोषणाओं को धरातल पर उतारा जाना है। सरकार की योजनाओं को अमल में लाने के लिए दोनों विभागों में नियमित अफसर नहीं हैं, जो फिलहाल कार्यरत हैं उनमें कई रिटायर होने वाले हैं। ऐसे में कार्यवाहक अफसर ही जैसे-तैसे शिक्षा की गाड़ी दौड़ाएंगे। सूबे की नई सरकार ने विभागीय पदोन्नति के लिए कई बार गोपनीय सूचनाएं भी मंगाई हैं लेकिन, प्रमोशन नहीं हो पा रहा है, जबकि मुख्य सचिव इस संबंध में आदेश भी जारी कर चुके हैं।

शिक्षा विभाग में जून में हुए नियमित फेरबदल के दौरान ही अफसरों की कमी सामने आ गई थी। इसीलिए तमाम मंडलों में कार्यवाहक संयुक्त शिक्षा निदेशकों की तैनाती की गई, साथ ही कार्यवाहक अफसरों दो-दो मंडलों का काम सौंपा जा चुका है। शासन ने संयुक्त शिक्षा निदेशकों की डीपीसी करके कमी पूरा करने का प्रयास किया लेकिन, समस्या बरकरार है। ऐसे ही हालात अपर शिक्षा निदेशक स्तर पर होने वाले हैं। प्रदेश में अपर शिक्षा निदेशक के 12 पद हैं। अभी तक नौ अपर निदेशकों से किसी तरह से काम चलाया जा रहा था।

अक्टूबर में दो अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक डा. रमेश व एडी महिला शैल यादव सेवानिवृत्त होंगी। इसके बाद शिक्षा निदेशालय में सिर्फ अपर शिक्षा निदेशक बेसिक विनय कुमार पांडेय ही बचेंगे। ऐसे में सिर्फ छह अपर शिक्षा निदेशक बेसिक व माध्यमिक में होंगे। इनमें से तीन लखनऊ व तीन इलाहाबाद में होंगे। यह हालात तब हैं जब एक अपर शिक्षा निदेशक ने शासन से वीआरएस स्वीकृत करा लिया, बाद में उसे लेने से इन्कार कर दिया। अपर शिक्षा निदेशक नीना श्रीवास्तव के पास यूपी बोर्ड की सचिव और माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उप्र के सचिव का दोहरा प्रभार है। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियां शुरू हो गई हैं और चयन बोर्ड का विलय होना है ऐसे में उनके लिए आगे दोहरी जिम्मेदारी निभाना बेहद कठिन होगा। इसी तरह से उप शिक्षा निदेशक व जिला विद्यालय निरीक्षकों का भी हाल है।

BOUNS : राज्य कर्मचारियों व शिक्षकों ने दी चेतावनी, हुए लामबंद, मांगों को लेकर प्रदेश सरकार पर लगाया टालमटोल का आरोप, मुख्यमंत्री से समाधान की मांग, दीपावली से पहले मांगा बोनस

BOUNS : राज्य कर्मचारियों व शिक्षकों ने दी चेतावनी, हुए लामबंद, मांगों को लेकर प्रदेश सरकार पर लगाया टालमटोल का आरोप, मुख्यमंत्री से समाधान की मांग, दीपावली से पहले मांगा बोनस

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : राज्य कर्मचारियों और शिक्षकों ने प्रदेश सरकार पर मांगों व समस्याओं पर टालमटोल करने का आरोप लगाते हुए दीपावली के बाद काम ठप करने की चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वार्ता के जरिये समाधान निकालने और दीपावली से पहले बोनस दिए जाने सहित कई मांगें रखते हुए कर्मचारियों व शिक्षकों ने जीपीएफ की ब्याज दर में कमी किए जाने और महंगाई भत्ते की किश्त सिर्फ एक फीसद किए जाने पर नाराजगी जताई है।

कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चे की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा गया है कि आधारहीन संगठनों से भेंट करके उनका आंदोलन स्थगित कराने से राज्य कर्मचारियों की नाराजगी दूर नहीं होगी। यदि वह प्रदेश के 22 लाख कर्मचारियों और शिक्षकों की नाराजगी दूर करना चाहते हैं तो मिल-बैठकर छठे वेतन आयोग की वेतन विसंगतियों और केंद्र के समान भत्तों के साथ ही स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ, राज्य निगम कर्मचारी महासंघ, शिक्षणोत्तर कर्मचारी महासंघ, माध्यमिक शिक्षक संघ, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ, राज्य कर्मचारी महासंघ, फार्मासिस्ट महासंघ, नर्सेस संघ, एक्स रे टेक्नीशियन संघ, स्वायत्त कर्मचारी संवर्ग की समस्याओं का समाधान करें।

मोर्चा अध्यक्ष वीपी मिश्र, संयोजक सतीश कुमार पांडेय, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शशि कुमार मिश्र, अतुल मिश्र व मनोज मिश्र ने मुख्यमंत्री से दीपावली से पहले बोनस का भुगतान किए जाने की मांग की है। कर्मचारी नेताओं ने बताया कि स्थानीय निकायों और राज्य निगमों के कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का पूरा लाभ नहीं मिला, जबकि केजीएमयू व अन्य विशिष्ट संस्थानों के कर्मचारियों को यह वेतनमान अब तक नहीं मिला। इसी तरह न तो परिवहन निगम कर्मचारियों के साथ हुए समझौतों को लागू किया गया और न ही वर्ष 2001 के बाद के संविदा कर्मचारियों को विनियमित किए जाने पर कार्यवाही शुरू हुई।

🔵 मांगों को लेकर प्रदेश सरकार पर लगाया टालमटोल का आरोप

🔴 मुख्यमंत्री से समाधान की मांग, दीपावली से पहले मांगा बोनस

Friday, September 29, 2017

GRATUITY, ALLAHABAD HIGHCOURT, आपराधिक मुकदमा चल रहा हो तो रोकी जा सकती है ग्रेच्युटी - इलाहाबाद हाईकोर्ट

GRECHUTI, ALLAHABAD HIGHCOURT, आपराधिक मुकदमा चल रहा हो तो रोकी जा सकती है ग्रेच्युटी - इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि आपराधिक मुकदमा चल रहा हो तो ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है. कोर्ट ने ऐसे आदेश पर हस्तक्षेप से इंकार कर दिया है. कोर्ट ने पीएसी 42 बटालियन नैनी इलाहाबाद से सेवानिवृत्त प्लाटून कमांडर शिव नारायण सिंह की ग्रेच्युटी रोकने के कमांडेन्ट के आदेश को सही माना है. और यची के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को यथाशीघ्र निर्णीत करने का निर्देश दिया है.

यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण टंडन तथा न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की खंडपीठ ने शिव नारायण सिंह को विशेष अपील को खारिज करते हुए दिया है. मालूम हो कि पीएसी कमांडेन्ट ने 22 अक्टूबर 2012 के आदेश से प्लाटून कमांडर की ग्रेच्युटी रोक दी.

31अक्टूबर 2012 को वह सेवानिवृत्त होने वाले थे, विधिविरुद्ध गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में याची पर आपराधिक मुकदमा चल रहा है. याची को मिलने वाली ग्रेच्युटी इसी आधार पर रोक दी गयी. जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी.

याची का कहना था के आपराधिक मुकदमा विचाराधीन होने मात्र से ग्रेच्युटी नहीं रोकी जा सकती. 1961 की सेवा नियमावली में ग्रेच्युटी रोकने का कोई उपबन्ध नहीं है. सिविल सर्विस रेग्युलेशन पर नियमावली प्रभावी होगी.

एकलपीठ ने कमांडेंट के ग्रेच्युटी रोकने के आदेश को रेग्युलेशन के अंतर्गत मिले अधिकारों के तहत माना और याचिका खारिज कर दी. जिसे इस विशेष अपील में चुनौती दी गयी थी. याची अधिवक्ता का कहना था कि सेवा नियमावली में ग्रेच्युटी रोकने का उपबंध नहीं है.

रेग्यूलेशन 351 ए के तहत नियमावली के विपरीत ऐसा आदेश विधि विरुद्ध है. कोर्ट ने कहा कि सिविल सर्विस रेग्यूलेशन और 1961 की नियमावली में कोई विरोधाभास नहीं है. नियम 9 के तहत रेग्युलेशन 351 ए एवं कोर्ट के फैसलों को देखते हुए हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता. और कहा कि आरोप गंभीर है ।जिसके आधार पर केस चल सकता है. ऐसे में एकलपीठ के आदेश पर हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं है.

Lebal - #allahabad high court

ENGLISH MEDIUM, UP GOVERNMENT : अब सरकारी प्राइमरी स्कूलों में होगी इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई, सरकारी प्राइमरी स्कूलों को कॉन्वेंट के तर्ज पर विकसित करने की कवायद सिर्फ यूनिफार्म बदलने तक ही सीमित नहीं

ENGLISH MEDIUM, UP GOVERNMENT : अब सरकारी प्राइमरी स्कूलों में होगी इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई, सरकारी प्राइमरी स्कूलों को कॉन्वेंट के तर्ज पर विकसित करने की कवायद सिर्फ यूनिफार्म बदलने तक ही सीमित नहीं

लखनऊ । उत्तर प्रदेश की सत्ता में बीजेपी के आते ही कई चीजों में बदलाव शुरू हो गया है. सरकारी प्राइमरी स्कूलों को कॉन्वेंट के तर्ज पर विकसित करने की कवायद सिर्फ यूनिफार्म बदलने तक ही सीमित नहीं होगी. बल्कि सरकार इन स्कूलों में पढ़ाई भी इंग्लिश मीडियम से कराएगी. इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने काम भी शुरू कर दिया है.

इस बदलाव पर बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल ने बताया कि शुरुआत में कुछ स्कूलों को इंग्लिश मीडियम के तहत चलाया जाएगा. इसके लिए प्रदेश के सरकारी प्राइमरी स्कूलों को ब्लॉकवार चिन्हित कर उनमें इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई कराई जाएगी. जायसवाल ने बताया कि अभी सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को एक सब्जेक्ट के रूप में इंग्लिश पढ़ाई जाती है. इसके अलावा बाकी विषयों की पढ़ाई अधिकतर स्कूलों में हिंदी मीडियम से होती है. लेकिन इस योजना के लागू होने के बाद सरकारी स्कूल के बच्चे इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई करेंगे.

अनुपमा जायसवाल ने बताया कि स्कूलों को चिन्हित करने के बाद यहां ऐसे शिक्षकों को नियुक्त किया जाएगा जो बच्चों को इंग्लिश मीडियम से पढ़ा सकें. इसके लिए बेसिक शिक्षा मंत्री ने वर्तमान में कार्यरत ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार करने को कहा है. योगी सरकार ने इसी सत्र से इन स्कूलों में बच्चों की खाकी वर्दी जैसी यूनिफॉर्म को बदलावाकर कॉन्वेंट स्कूल जैसी यूनिफॉर्म भी दी है. जायसवाल ने कहा कि अब इसी दिशा में एक कदम और बढ़ाते हुए बेसिक शिक्षा विभाग बच्चों की पढ़ाई इंग्लिश मीडियम से कराने के लिए काम कर रहा है.

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