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एक छत के नीचे 'प्राइमरी का मास्टर' से जुड़ी शिक्षा विभाग की समस्त सूचनाएं एक साथ

TEACHERS, TRANSFER : जनशक्ति निर्धारण के तहत शिक्षकों की तैनाती की समीक्षा, परिषदीय स्कूल जुलाई में न रहेगा एकल विद्यालय, शिक्षकों के तबादले से पहले जिलों में समायोजन करने की तैयारी

TEACHERS, TRANSFER : जनशक्ति निर्धारण के तहत शिक्षकों की तैनाती की समीक्षा, परिषदीय स्कूल जुलाई में न रहेगा एकल विद्यालय, शिक्षकों के तबादले से पहले जिलों में समायोजन करने की तैयारी

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद । प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों को एकल शिक्षक विहीन करने की तैयारी है। हर जिले के कुछ क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी और कुछ में शिक्षकों की अधिकता है इसका अब संतुलन बनाया जाएगा। सरप्लस शिक्षकों को हटाकर एकल स्कूलों में भेजने की योजना है। जनशक्ति की समीक्षा में यह बातें सामने आई हैं।

बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में पठन-पाठन न हो पाने का मूल कारण शिक्षकों की कमी और अधिकता है। वहीं, जिन स्कूलों में औसत शिक्षक तैनात हैं, वहां की पढ़ाई कुछ हद तक दुरुस्त भी है। तीन वर्षो में करीब तीन लाख शिक्षकों की तैनाती स्कूलों में हुई है, इसके बाद भी एकल विद्यालय और जिले के रिमोट एरिया में शिक्षकों की कमी का संकट बना है। असल में हर शिक्षक मुख्य सड़क के करीब तैनाती पाने के लिए हर जतन कर रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारी उसकी मुराद भी पूरी करते आ रहे हैं। इतना ही नहीं जिन शिक्षकों का करीब के स्कूल में तबादला नहीं हो सका उन्हें संबद्ध किया गया है। इसीलिए स्कूलों में पदों का निर्धारण गड़बड़ा गया है। पिछले सत्र में करीब सात हजार विद्यालय एकल शिक्षक वाले रहे हैं इस बार यह संख्या और अधिक हो गई है, क्योंकि अंतर जिला तबादला होने के बाद शिक्षकों का समायोजन सही तरीके से नहीं हो सका है। यही नहीं बार-बार निर्देश देने के बाद भी शिक्षकों की चहेते स्कूल व कार्यालय से संबद्धता खत्म नहीं हो रही है।

इसे दूर करने के लिए परिषद मुख्यालय पर जनशक्ति निर्धारण की समीक्षा हो रही है। अलग-अलग जिलों के संबंध में विस्तृत चर्चा करके यह संकट दूर करने की तैयारी है। शिक्षा महकमा जुलाई से विद्यालयों में शिक्षकों का असंतुलन दूर करने की तैयारी में है, कोई भी विद्यालय एकल न रहे और जहां पर भी सरप्लस शिक्षक हैं वह हटाकर कम शिक्षक वाले विद्यालय में भेजने की मंशा है। माना जा रहा है कि यह अमल में लाने के बाद ही शैक्षिक कैलेंडर और समय सारिणी का सही से उपयोग हो सकेगा। आखिर एक शिक्षक कौन से नियम का पालन कर पाएगा।

शिक्षकों के तबादले से पहले जिलों में समायोजन करने की तैयारी है। हालत यह है कि बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने इस दिशा में सही से काम नहीं किया और जिले के अंदर स्थानांतरण का अधिकार डीएम को देने के बाद भी बदलाव नहीं हुआ है। अब पद निर्धारण से जिलों में बड़ा उलटफेर होने की उम्मीद है।

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