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एक छत के नीचे 'प्राइमरी का मास्टर' से जुड़ी शिक्षा विभाग की समस्त सूचनाएं एक साथ

MAN KI BAAT : एटा हादसे के हृदय विदारक घटना से सबक लेने की जरूरत है क्योंकि प्रशासन के एजेंडे में भी नियमों का पालन करवाना शामिल नहीं और स्कूल प्रबंधन के प्रति उनका रवैया नरम ही रहता है कारण चाहे जो............?

MAN KI BAAT : एटा हादसे के हृदय विदारक घटना से सबक लेने की जरूरत है क्योंकि प्रशासन के एजेंडे में भी नियमों का पालन करवाना शामिल नहीं और स्कूल प्रबंधन के प्रति उनका रवैया नरम ही रहता है कारण चाहे जो............?

🔴 एटा हादसे के सबक

एटा में गुरुवार को स्कूली बस और ट्रक की टक्कर में 12 बच्चों की मौत ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। यह हृदय विदारक घटना इस बात का सुबूत है कि यदि हम आदेशों-नियमों को दरकिनार करते रहेंगे, तो इसकी कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। घर से सुबह बच्चों को तैयार करके भेजते समय मां-बाप ने नहीं सोचा होगा कि स्कूल प्रबंधन की तानाशाही उन्हें जीवन भर का दंश दे देगी। कोहरे और ठंड की वजह से जिलाधिकारी ने स्कूल बंद करने का आदेश दिया था। इसके बावजूद प्रबंधन ने स्कूल खोलने की हिमाकत की लिहाजा अभिभावक उन्हें स्कूल भेजने के लिए विवश हुए।

दरअसल, प्रदेश के कई स्कूल जिनमें बड़ी संख्या अंग्रेजी माध्यम वालों की है, खुद को विशिष्ट मानते हैं और अक्सर प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी कर देते हैं। चूंकि ऐसा करने के बाद भी उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, इसलिए उनके हौसले बढ़ते जाते हैं। उनकी ऊंची पहुंच भी उन्हें किसी कार्रवाई के दायरे से बाहर कर देती है। गुरुवार का दिन स्कूली बच्चों के लिहाज से काला दिन माना जाएगा क्योंकि फरुखाबाद में भी ऐसे ही एक हादसे में आधा दर्जन बच्चे गंभीर रूप से घायल हुए।

याद होगा कि कुछ माह पहले ही भदोही जिले में एक स्कूली वैन पैसेंजर ट्रेन से टकरा गई थी। उस हादसे में आठ बच्चों की मौत हो गई थी। उस घटना में भी प्रबंधन की लापरवाही सामने आयी थी। स्कूली बच्चों को वाहन से लाने-ले जाने के लिए कुछ नियम तय हैं लेकिन किसी भी जिले में उनकी धज्जियां उड़ती सरेआम देखी जा सकती है। कोई भी विद्यालय मानकों का पालन नहीं करता। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार स्कूल बस के चालक को पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए। बसों में फस्र्टएड की व्यवस्था भी होनी चाहिए।

सीट क्षमता के अनुसार ही बच्चों को बैठाया जाना चाहिए और बस चालक के साथ एक अतिरिक्त बस चालक होना चाहिए लेकिन इसका पालन कहीं भी नहीं होता। प्रशासन के एजेंडे में भी इन नियमों का पालन करवाना शामिल नहीं और स्कूल प्रबंधन के प्रति उनका रवैया नरम ही रहता है। एटा की घटना इन लापरवाहियों का ही नतीजा है और निश्चित तौर पर इसके लिए स्कूल प्रबंधन और एटा का शिक्षा विभाग ही जिम्मेदार है।

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1 Comments

  1. ✍ एटा में हुए बच्चों के साथ हृदय विदारक घटना पर पूरी टीम अश्रुपूरित श्रद्धाजंलि समर्पित करता है ।
    📌 MAN KI BAAT : एटा हादसे के हृदय विदारक घटना से सबक लेने की जरूरत है क्योंकि प्रशासन के एजेंडे में भी नियमों का पालन करवाना शामिल नहीं और स्कूल प्रबंधन के प्रति उनका रवैया नरम ही रहता है कारण चाहे जो............?
    👉 http://www.basicshikshanews.com/2017/01/man-ki-baat_20.html

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