Tuesday, January 31, 2017

YOGA : नौनिहालों को ‘गुरु जी’ सिखाएंगे योग, जिला शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान ब्लाक वार शिक्षकों को योग का दिलायेगा प्रशिक्षण, शासन ने इस संबंध में दिशा निर्देश जारी कर दिए

YOGA : नौनिहालों को ‘गुरु जी’ सिखाएंगे योग, जिला शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान ब्लाक वार शिक्षकों को योग का दिलायेगा प्रशिक्षण, शासन ने इस संबंध में दिशा निर्देश जारी कर दिए

जासं, इलाहाबाद : अगर आपका लाडला सुबह अनुलोम विलोम या आसन लगाने लगे तो चौंकने की जरूरत नहीं है। दरअसल विद्यार्थियों को शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ बनाने के लिए अब परिषदीय स्कूल के नौनिहालों को योग सिखाया जाएगा। इसके लिए पहले तो जिला शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान ब्लाक वार शिक्षकों को योग के प्रशिक्षण दिलाएगा। शासन ने इस संबंध में दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।

बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने डायट को शिक्षकों की सूची उपलब्ध करा दी है। फरवरी माह के प्रथम सप्ताह से शिक्षकों को ग्रुप में पतंजलि योगपीठ के मास्टर ट्रेनर योग की शिक्षा देंगे। यहां से प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षक अपने स्कूलों के विद्यार्थियों को योग करना सिखाएंगे। 1प्रशिक्षण के दौरान योग प्रशिक्षक शिक्षकों को अनुलोम विलोम, कुंभक, पदमासन, सुखासन, हलासन, सूर्यासन समेत कई आसनों को करने के तौर तरीके की जानकारी दी जाएगी। साथ ही योग से होने वाले फायदे गिनाए जाएंगे।

उप बेसिक शिक्षा अधिकारी अजरुन सिंह ने बताया कि योग की पाठशाला स्कूलों में लगने से निश्चित ही बच्चे शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ होंगे। उनकी बौद्धिक क्षमता का विकास होगा। भविष्य में बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।

ALLAHABAD HIGHCOURT, INTERDISTRICT TRANSFER : शिक्षकों के अंतर्जनपदीय तबादलों पर कोर्ट ने लगाई रोक, ज्वाइन करने के बाबजूद भी पुराने स्कूल में लौटना होगा ।

ALLAHABAD HIGHCOURT, INTERDISTRICT TRANSFER : शिक्षकों के अंतर्जनपदीय तबादलों पर कोर्ट ने लगाई रोक, ज्वाइन करने के बाबजूद भी पुराने स्कूल में लौटना होगा ।

GOVERNMENT ORDER, CM, APPOINTMENT, INSPECTION, उत्तर प्रदेश के जू0हा0स्कूल विद्यालयों में हुए गलत ढंग से नियुक्तियों की जाँच के सम्बन्ध में, मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) शिक्षा उत्तर प्रदेश को जारी किया गया पत्र ।

GOVERNMENT ORDER, CM, APPOINTMENT, INSPECTION, उत्तर प्रदेश के जू0हा0स्कूल विद्यालयों में हुए गलत ढंग से नियुक्तियों की जाँच के सम्बन्ध में, मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) शिक्षा उत्तर प्रदेश को जारी किया गया पत्र

SCHOOL, HIGHCOURT : नेबरहुड नीति से निजी स्कूलों का अधिकार छीना, सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने पर दें जोर, क्या सरकार ने तैयार कराया था स्कूलों का नक्शा - हाई कोर्ट

SCHOOL, HIGHCOURT : नेबरहुड नीति से निजी स्कूलों का अधिकार छीना, सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने पर दें जोर, क्या सरकार ने तैयार कराया था स्कूलों का नक्शा - हाई कोर्ट

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : हाई कोर्ट ने नर्सरी दाखिले से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को दिल्ली सरकार से पूछा कि क्या उसने निजी स्कूलों में नेबरहुड नीति लागू करने से पूर्व क्षेत्र में स्कूलों की संख्या व उनका नक्शा तैयार करवाया था। न्यायमूर्ति मनमोहन ने शिक्षा विभाग से कहा कि आपको इस प्रकार का आदेश जारी करने से पहले भौगोलिक मानचित्रण सर्वेक्षण करवाना चाहिए था। यह जानना चाहिए था कि क्षेत्र में अभिभावकों व बच्चों की क्या मांग है।

अदालत ने कहा कि आपने नेबरहुड नीति के जरिये पूरी तरह से निजी स्कूलों का अधिकार छीन लिया। अपने बनाए गए नियम से उनकी स्वायत्तता नहीं छीन सकते। इससे वे स्कूलों में निवेश करना बंद कर देंगे। निजी स्कूलों की स्वायत्तता खत्म करने की अपेक्षा सरकारी स्कूलों में सुधार किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में माता-पिता ही इन स्कूलों को चुनें। उपराज्यपाल की और से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में सुधार के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं और काफी सुधार भी आया है। उन्होंने सरकार से सस्ती दरों पर भूमि लेने वाले निजी अस्पतालों का हवाला देते हुए कहा कि इन अस्पतालों ने भी अब तय शर्तो के अनुसार आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लोगों को निशुल्क इलाज दिया जा रहा है। इस पर अदालत ने कहा कि सरकार किसी के भी अधिकार क्षेत्र में प्रवेश किए बिना काम करे।

दिल्ली सरकार ने सात जनवरी को नर्सरी दाखिले के लिए दिशा-निर्देश तय करते हुए कहा था कि डीडीए व अन्य एजेंसियों से सस्ती दरों पर भूमि लेने वाले निजी स्कूलों व अल्पसंख्यक स्कूलों को नेबरहुड यानि आस-पड़ोस के बच्चों को ही दाखिला देना होगा। हाई कोर्ट में इस अधिसूचना के खिलाफ अभिभावकों, निजी स्कूलों के दो संघ व तीन निजी गैर सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक स्कूलों ने याचिका दायर की है।

निजी स्कूलों ने सरकार पर वादा पूरा नहीं करने का लगाया आरोप

जासं, नई दिल्ली : निजी स्कूलों ने दिल्ली सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। निजी स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि अगर उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। सोमवार को प्रेस क्लब में निजी स्कूलों की संस्था नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस (निसा) व कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ पब्लिक स्कूल्स (सीसीपीएस) ने साझा प्रेस कांफ्रेंस की। सीसीपीएस के चेयरमैन आरके शर्मा ने कहा कि गत वर्ष सितंबर में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा था कि स्कूलों को मान्यता प्रदान करने के लिए जमीन के बजाए कमरों की संख्या को आधार बनाया जाएगा। उस घोषणा के बाद से इस संदर्भ में अबतक कोई प्रगति नहीं हुई है। निसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने कहा कि सरकार के काम करने के तरीकों से अब यह आस टूटती दिख रही है। वहीं, दिल्ली इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस (दिसा) के अध्यक्ष राजेश मल्होत्र ने कहा कि निजी स्कूलों के साथ होने वाला भेदभाव तभी खत्म होगा जब उनके लिए अलग बोर्ड की व्यवस्था हो।

Monday, January 30, 2017

COOK : स्कूलों के रसोईया बनायेंगे सुरक्षाकर्मियों का भोजन, उन प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के रसोईयों का मोबाइल नंबर जुटाया जा रहा है जहां विधानसभा चुनाव के लिए बूथ बनाए गए

COOK : स्कूलों के रसोईया बनायेंगे सुरक्षाकर्मियों का भोजन, उन प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के रसोईयों का मोबाइल नंबर जुटाया जा रहा है जहां विधानसभा चुनाव के लिए बूथ बनाए गए
   
वाराणसी वरिष्ठ संवाददाता : उन प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के रसोईयों का मोबाइल नंबर जुटाया जा रहा है जहां विधानसभा चुनाव के लिए बूथ बनाए गए हैं। मतदान के दिन रसोइयां ही सुरक्षाकर्मियों के लिए भोजन भी बनायेंगे। इन नम्बरों का उपयोग कम्युनिकेशन प्लान के तहत किया जाएगा। रसोइयों से बूथ के बारे में जानकारी मांगी जाएगी।

निर्वाचन कार्यालय से निर्देश मिलने के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी ने प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक से रसोइयों का नंबर तलब किया है। पूर्व में भी विद्यालयों को एक फार्मेट भेजा गया था जिसमें उनसे चुनाव संबंधी जानकारी मांगी गई थी। उसमें मोबाइल नंबर का भी कॉलम था लेकिन कई विद्यालयों ने उसे भरा नहीं।

यह माना जा रहा है कि जिले में 5175 रसोईयां है। कई विद्यालयों में चार-चार रसोईयां हैं। यह माना जा रहा है कि रसोइयां आसपास के इलाकों के होते हैं। पोलिंग पार्टियों के वहां पहुंचने पर उन्हें सटीक जानकारी रसोइयों से मिलेगी। इसके अलावा । उन्हें ही भोजन बनाने जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। अधिकतर रसोइयां ग्रामीण इलाकों के प्राथमिक, जूनियर और माध्यमिक विद्यालयों में ही तैनात हैं।

TET, SHIKSHAK BHARTI : शिक्षक भर्ती में टीईटी मेरिट जरूरी नहीं, एक लाख को राहत, एकेडमिक रिकॉर्ड पर नियुक्त एक लाख शिक्षकों को राहत, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने आरटीआई में दिया जवाब

TET, SHIKSHAK BHARTI : शिक्षक भर्ती में टीईटी मेरिट जरूरी नहीं, एक लाख को राहत, एकेडमिक रिकॉर्ड पर नियुक्त एक लाख शिक्षकों को राहत, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने आरटीआई में दिया जवाब

इलाहाबाद संजोग मिश्र । यूपी के सरकारी स्कूलों में सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए टीईटी मेरिट अनिवार्य नहीं है। देशभर में शिक्षक भर्ती की न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने वाली राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने आधा दर्जन से अधिक आरटीआई के जवाब में यह साफ किया है कि टीईटी अंकों को वरीयता या नहीं देना राज्य सरकार का अधिकार है।

हाईकोर्ट से अध्यापक सेवा नियमावली 1981 का 15वां और 16वां संशोधन निरस्त होने के बाद पिछले चार साल में एकेडमिक रिकॉर्ड के आधार पर नियुक्त यूपी के तकरीबन एक लाख शिक्षकों की नौकरी संकट में है। इस फैसले से उन्हेंबड़ी राहत मिली है।

BTC EXAM : बीटीसी परीक्षाओं पर संकट के बादल, परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव ने परीक्षाएं रोकने की स्पष्ट वजह बताने की जगह अपरिहार्य कारण गिनाया

BTC : बीटीसी परीक्षाओं पर संकट के बादल, परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव ने परीक्षाएं रोकने की स्पष्ट वजह बताने की जगह अपरिहार्य कारण गिनाया

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय बीटीसी 2013 के तृतीय व चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षाओं का मुहूर्त ही तय नहीं कर पा रहा है। पिछले दिनों किसी तरह इम्तिहान की तारीखें घोषित हुईं, लेकिन चंद दिनों में ही उस पर भी रोक लगा दी गई है। अभ्यर्थी यह समझ ही नहीं पा रहे हैं कि आखिर विलंब से चल रहा सत्र पूरा होने का नाम क्यों नहीं ले रहा है। वहीं, जो अभ्यर्थी अभी तक चौथे सेमेस्टर में पहुंचे ही नहीं, उनका प्रशिक्षण शुरू करा दिया गया है।

प्रदेश में बीटीसी 2013 प्रथम व द्वितीय काउंसिलिंग के युवाओं का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। यह अभ्यर्थी शिक्षक बनने की दौड़ में शामिल हो गए हैं लेकिन तृतीय काउंसिलिंग के अभ्यर्थियों का हाल बुरा है। उनकी दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा अगस्त-सितंबर 2016 में हुई। दिसंबर 2016 में ही तीसरे सेमेस्टर का इम्तिहान होना था लेकिन काफी विलंब के बाद उसका कार्यक्रम पिछले दिनों जारी किया गया। दो दिन बाद ही उस पर रोक लगा दी गई है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव ने परीक्षाएं रोकने की स्पष्ट वजह बताने की जगह अपरिहार्य कारण गिनाया है। कई मर्तबा तृतीय सेमेस्टर के अभ्यर्थी परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन करके जल्द परीक्षा कराने की मांग कर चुके हैं। प्रदेश में ऐसे अभ्यर्थियों की संख्या करीब तीन से चार हजार है। अभ्यर्थियों को चौथे सेमेस्टर में एक माह तक पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाना होता है ।

SHIKSHAK BHARTI : शिक्षक भर्ती के लिए युवाओं में फिर खिंची तलवारें, महज चर्चा के आधार पर ही युवाओं में इन दिनों तलवारें खिंच गई

SHIKSHAK BHARTI : शिक्षक भर्ती के लिए युवाओं में फिर खिंची तलवारें, महज चर्चा के आधार पर ही युवाओं में इन दिनों तलवारें खिंच गई

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : शिक्षक भर्ती में शामिल रहे युवा पहले से अलग-अलग खेमों में बंटे हैं। भर्ती मामले न्यायालय में पहुंचने पर चयनित और चयन से चूकने वालों के बीच अपने को सही साबित करने की होड़ मची है। इस बीच चुनावी माहौल में राजनीतिक दलों की जुबां से युवाओं के लिए निकली आवाज के मायने भी निकाले जा रहे हैं और उसी तहत समर्थन और विरोध का सिलसिला तेज हो गया है। महज चर्चा के आधार पर ही युवाओं में इन दिनों तलवारें खिंच गई हैं।

युवाओं को रोजगार की बातें रास आती हैं। उनकी ख्वाहिश ज्यादा से ज्यादा नौकरियों के मौके मिले, लेकिन किसी खास की नौकरी को लेकर बात आए तो दूसरे पक्ष का विपक्षी बन जाना लाजिमी है। पिछले दिनों कुछ ही ऐसा ही हुआ। सूबे के एक दल ने शिक्षामित्रों के प्रकरण को उठा दिया।

MEENA KI DUNIYA : मीना की दुनिया - रेडियो प्रसारण, एपिसोड 54 । कहानी का शीर्षक - “न बाबा न” क्लिक कर देखें । 

MEENA KI DUNIYA : मीना की दुनिया - रेडियो प्रसारण, एपिसोड 54 । कहानी का शीर्षक - “न बाबा न” क्लिक कर देखें । 

👉 मीना की दुनिया-रेडियो प्रसारण
👉 एपिसोड- 54
👉 दिनांक 30/01/2017
👉 प्रसारण समय 11:30 से 11:30 तक
                                                                                    🔵 कहानी का शीर्षक- “न बाबा न"
            
                    मीना रसोई में अपनी माँ का हाथ बटा रही है।
मीना के पिताजी घर में घुसते वक़्त उसकी तारीफ़ करते हैं क्योंकि मीना ने ही इसबार पूरे हफ्ते का हिसाब-किताब किया था.....उसके कारण उन्हें अपनी फसल के अच्छे दाम मिले हैं। वे मीना के लिए एक गुड़िया लाये हैं.......और राजू के लिए कमीज|
     
         मीना ......ख़ुशी ख़ुशी.... अपनी दादी को दुल्हन सी सजी गुड़िया दिखाती है।
मीना की दादी के यह कहने पर की अगले 1 या 2 सालों में जब वो मीना की शादी करेंगे तो वह भी ऐसे ही सुन्दर लगेगी, ..........उसके पिताजी कहते हैं की "न बाबा न " कच्ची उम्र में शादी की तो उन्हें जेल हो जायेगी और वे जेल नहीं जाना चाहते।

मीना पूछती है, “ ....क्या ये सच है?.......”
पिताजी - 18 से कम लड़की और 21 से कम लड़के को शादी कानूनन जुर्म है।
     मीना पूछती है की गुड्डी दीदी के पिताजी (भोला चाचा) को क्या फिर से जेल जाना पड़ेगा ?
(जो कि अभी जेल से वापस आये हैं)
पिताजी- तुम ऐसा क्यों कह रही हो मीना?
मीना-  गुड्डी दीदी अभी 15 साल की नहीं हुई।
    
    गुड्डी दीदी और दीपू की बहन का जन्म एक ही दिन हुआ था, और दीपू की बहन अगले महीने 15 वर्ष की होगी। गुड्डी दीदी आज तक कभी स्कूल नहीं गयी है|  यह सुनकर सब अचंभित हो जाते हैं और कुछ करने का फैसला करते हैं।
   
     और अगले दिन मीना स्कूल के बाद जा जब गुड्डी से मिलती है तो  गुड्डी दीदी को बताती है की अगर उसकी शादी  हुई तो भोला चाचा को जेल हो जायेगी क्योंकि उसकी आयु  अभी 18 वर्ष से कम है।
गुड्डी उदास हो जाती है।
      गुड्डी अपने घर जाकर अपने माता पिता से कहती है की वह यह शादी नहीं करेगी क्योंकि वह नहीं चाहती की उसके पिताजी को जेल हो जाए। ............तभी वहाँ मीना और उसके माता पिता भी आ जाते हैं तथा गुड्डी के माता पिता को समझाते है की वो गलत कर रहे हैं।

       उसी वक़्त गुड्डी के घर......गुड्डी के होने वाले ससुर रामलाल जीआते हैं |
गुड्डी के होने वाले ससुर- .भई ये शादी करवानी है तो  15000/- की जगह 25000/- देने होंगे,  साथ में दो गाय........आदि
     
       वहां मौजूद सभी बोलते हैं की यह तो दहेज़ मांग रहे हैं।

       गुड्डी के पिता....कहते हैं.......की वो ये शादी नहीं कराएंगे|
         रामलाल  कहते हैं की वे गुड्डी के पिता को जेल भिजवा देंगे क्योंकि गुड्डी की उम्र कम है।
गुड्डी के पिताजी जवाब देते हैं की जेल तो उन्हें भी होगी क्योंकि लड़के की उम्र 18 से कम है।

       ........तभी बहिन जी भी वहां पहुँच जाती हैं...जो भोला को समझाती हैं|
आज का गाना-
                      लाड प्यार से पली हूँ मैं तो,
                      नन्ही सी एक कली हूँ मैं तो|
                      मुझे डाल से अभी न तोड़ो,
                      मेरा रिश्ता अभी न जोड़ो|
                     ..................................

🔵 आज का खेल -       

“कड़िया जोड़ पहेली तोड़”
हर दिन घटता बढ़ता हूँ,
साथ-साथ में चलता हूँ,
यूँ तो चेहरे पर है दाग है चेहरे पर
फिर भी सुन्दर दिखता हूँ
                                                                                     🔴 उत्तर- चाँद

🌑 कहानी का सन्देश-    

कानूनन  शादी की उम्र  - लड़के की 21 तथा लडकी की 18 साल|
                                  लड़का लड़की को पढ़ने लिखने का  सामान अधिकार हैं|

CHILDREN : 'आरती’ की रोशनी में कई दीये रौशन, रोगियों के बच्चों को भीख मांगने से रोक पहुंचाया स्कूल, गंगा की निर्मलता को भी रहे सक्रिय

CHILDREN : 'आरती’ की रोशनी में कई दीये रौशन, रोगियों के बच्चों को भीख मांगने से रोक पहुंचाया स्कूल, गंगा की निर्मलता को भी रहे सक्रिय

प्रमोद यादव, इलाहाबाद : अपने लिए जिए तो क्या जिए, तू जी ए दिल जमाने के लिए। इस गीत का तराना आरती के लिए जैसे जीवन का ध्येय ही बन गया। अपने जीवन को कॅरियर बनाया उनके लिए जिनके जीवन का कोई कॅरियर ही नहीं था। जिनका जीवन अंधेरे में बीत रहा था उन्हें रोशनी दिखायी। मां गंगा की निर्मलता के लिए भी जूझना पड़ा तो पीछे नहीं हटीं। ऐसे ना जाने कितने छोटे-छोटे प्रयास करते वह बड़ी हो गईं, पता ही नहीं चला। यह कहानी है गंगा किनारे छप्परनुमा आवास में रह रही आरती सिंह की है। पिता ज्ञान सिंह लकड़ी बेच कर चार बेटियों और एक बेटे का परिवार चल रहे हैं।

आरती सिंह बताती हैं कि सन 2007 में जब वह हाईस्कूल में थी। तब एक शाम वह पिता के साथ त्रिवेणी बांध पर टहल रही थी। तभी एक लग्जरी कार से कुछ लोग आए और एक बच्ची को गंगा किनारे नाले में फेंककर भाग गए। बच्चे के रोने की आहट सुन वह अपने पिता और पड़ोस के कुछ लोगों के साथ मौके पर पहुंची। देखा कि नाले में एक बच्ची पड़ी है। उसे निकाला और नहलाया धुलाया तो पता चला वह मंद बुद्धि है। तब तक लोग समझ गए उसके परिजन क्यों फेंक गए।

फिलहाल आरती ने उस बच्ची को अपने पास रखा और प्रशासन के सहयोग से इलाज कराया। आजकल वह लखनऊ में है, वहीं उसका इलाज समय-समय पर होता है। इस एक घटना ने आरती के जीवन की धारा ही मोड़ दी। उन्होंने दिव्यांग और कुष्ठ रोगियों की सेवा का प्रण ले लिया। संगम किनारे पांच सौ से अधिक कुष्ठ रोगियों के परिवार पर अपना ध्यान केंद्रित किया। भीख मांगकर जीवनयापन कर रहे कुष्ठरोगियों के जीवनयापन में सुधार के लिए आरती ने दुर्बल कुष्ठ सेवा संस्थान नाम से एनजीओ शुरू किया। इसके जरिए उन्होंने कुष्ठ रोगियों के बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया और भीख मांगने से रोका। बच्चों का स्कूल में एडमीशन कराया। बच्चे जब स्कूल से पढ़ लिखकर निकले तो कहीं न कहीं काम करने लगे। आरती ने अपने छोटे से एनजीओ में दो बच्चों को नौकरी दी। कुष्ठ रोगियों का राशन कार्ड बनवाया तो उन्हें राशन मिलने लगा और कई सरकारी मदद भी दिलवाई व इलाज भी करवाया।

आरती बताती हैं कि प्रतापगढ़ की एक महिला पांच बेटियों के साथ हनुमान मंदिर के पास चाय की दुकान लगाती थी। उसके पति का निधन हो चुका था। कई लोगों से मदद लेकर आरती ने उनकी दो बेटियों की शादी करवाई। इसके अलावा संगम किनारे दर्जनों पौधे लगाए और गंगा सफाई के लिए लगातार सक्रिय रही।

इसी के साथ आरती ने अपनी भी आर्थिक हालत पर ध्यान देना जारी रखा और स्थिति सुधरने लगी। अपनी एक बहन को एमबीए तो दूसरी को पॉलीटेक्निक डिप्लोमा करवा रही हैं। वह मूलत: कौशांबी जिले के पश्चिम शरीरा गांव की रहने वाली हैं। आरती कहती हैं कि जीवन की धारा कल-कल करती नदी की तरह है, कभी नीचे तो कभी ऊपर होती रहती है। इसी में गिरना, फिर उठकर चलने वाला ही सफलता की सीढ़ियां चढ़ता है।

प्रमोद यादव, इलाहाबाद  : अपने लिए जिए तो क्या जिए, तू जी ए दिल जमाने के लिए। इस गीत का तराना आरती के लिए जैसे जीवन का ध्येय ही बन गया। अपने जीवन को कॅरियर बनाया उनके लिए जिनके जीवन का कोई कॅरियर ही नहीं था। जिनका जीवन अंधेरे में बीत रहा था उन्हें रोशनी दिखायी। मां गंगा की निर्मलता के लिए भी जूझना पड़ा तो पीछे नहीं हटीं। ऐसे ना जाने कितने छोटे-छोटे प्रयास करते वह बड़ी हो गईं, पता ही नहीं चला। यह कहानी है गंगा किनारे छप्परनुमा आवास में रह रही आरती सिंह की है। पिता ज्ञान सिंह लकड़ी बेच कर चार बेटियों और एक बेटे का परिवार चल रहे हैं।1आरती सिंह बताती हैं कि सन 2007 में जब वह हाईस्कूल में थी। तब एक शाम वह पिता के साथ त्रिवेणी बांध पर टहल रही थी। तभी एक लग्जरी कार से कुछ लोग आए और एक बच्ची को गंगा किनारे नाले में फेंककर भाग गए। बच्चे के रोने की आहट सुन वह अपने पिता और पड़ोस के कुछ लोगों के साथ मौके पर पहुंची। देखा कि नाले में एक बच्ची पड़ी है। उसे निकाला और नहलाया धुलाया तो पता चला वह मंद बुद्धि है। तब तक लोग समझ गए उसके परिजन क्यों फेंक गए। फिलहाल आरती ने उस बच्ची को अपने पास रखा और प्रशासन के सहयोग से इलाज कराया। आजकल वह लखनऊ में है, वहीं उसका इलाज समय-समय पर होता है। इस एक घटना ने आरती के जीवन की धारा ही मोड़ दी। उन्होंने दिव्यांग और कुष्ठ रोगियों की सेवा का प्रण ले लिया। संगम किनारे पांच सौ से अधिक कुष्ठ रोगियों के परिवार पर अपना ध्यान केंद्रित किया। भीख मांगकर जीवनयापन कर रहे कुष्ठरोगियों के जीवनयापन में सुधार के लिए आरती ने दुर्बल कुष्ठ सेवा संस्थान नाम से एनजीओ शुरू किया। इसके जरिए उन्होंने कुष्ठ रोगियों के बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया और भीख मांगने से रोका। बच्चों का स्कूल में एडमीशन कराया। बच्चे जब स्कूल से पढ़ लिखकर निकले तो कहीं न कहीं काम करने लगे। आरती ने अपने छोटे से एनजीओ में दो बच्चों को नौकरी दी। कुष्ठ रोगियों का राशन कार्ड बनवाया तो उन्हें राशन मिलने लगा और कई सरकारी मदद भी दिलवाई व इलाज भी करवाया।

आरती बताती हैं कि प्रतापगढ़ की एक महिला पांच बेटियों के साथ हनुमान मंदिर के पास चाय की दुकान लगाती थी। उसके पति का निधन हो चुका था। कई लोगों से मदद लेकर आरती ने उनकी दो बेटियों की शादी करवाई। इसके अलावा संगम किनारे दर्जनों पौधे लगाए और गंगा सफाई के लिए लगातार सक्रिय रही।

इसी के साथ आरती ने अपनी भी आर्थिक हालत पर ध्यान देना जारी रखा और स्थिति सुधरने लगी। अपनी एक बहन को एमबीए तो दूसरी को पॉलीटेक्निक डिप्लोमा करवा रही हैं। वह मूलत: कौशांबी जिले के पश्चिम शरीरा गांव की रहने वाली हैं। आरती कहती हैं कि जीवन की धारा कल-कल करती नदी की तरह है, कभी नीचे तो कभी ऊपर होती रहती है। इसी में गिरना, फिर उठकर चलने वाला ही सफलता की सीढ़ियां चढ़ता है।

HEALTH : इलाहाबाद समेत 44 जिलों में मनेगा राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस, कुपोषण से बचाने को मुहिम

HEALTH : इलाहाबाद समेत 44 जिलों में मनेगा राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस, कुपोषण से बचाने को मुहिम

13 जिलों में 18 मार्च को मुक्ति दिवस 1प्रदेश के 13 जिलों सिद्धार्थ नगर, संतकबीर नगर, श्रवस्ती, गोंडा, अमेठी, गोरखपुर, मऊ, कुशीनगर, देवरिया, सोनभद्र, जौनपुर, वाराणसी व चंदौली में फरवरी के बजाए 18 मार्च को कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाएगा और जो निर्देश 44 जिलों को दिए गए हैं, उन्हीं पर अमल किया जाना है।

🔴 इलाहाबाद समेत 44 जिलों में मनेगा राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस

राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : ‘स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है’ इस सूत्र वाक्य पर अमल होने जा रहा है। सूबे में स्कूली बच्चों को एनीमिया व कुपोषण से बचाने का अभियान शुरू होने जा रहा है। प्रदेश के 44 जिलों में आगामी 28 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाएगा। इसके तहत एक से लेकर 19 वर्ष तक के बच्चे, किशोर व युवाओं को पेट के कीड़ों से बचाने की दवा दी जाएगी। इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

स्वास्थ्य विभाग के अध्ययनों में यह पाया गया है कि प्रदेश के बच्चों में पेट के कीड़ों की व्यापकता 76 फीसद है। कीड़ों की वजह से वह कुपोषण एवं एनीमिया का शिकार हो जाते हैं। इससे उनका शारीरिक व मानसिक विकास तो प्रभावित होता ही है साथ ही स्कूल में उपस्थिति पर भी प्रभाव पड़ता है। इससे बचाने के लिए बच्चों को स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों पर पेट के कीड़ों की दवा खिलाई जाएगी। इस संबंध में शिक्षा निदेशक बेसिक दिनेश बाबू शर्मा ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश भी जारी कर दिए हैं।

संबंधित जिलों के हर विद्यालय के एक शिक्षक को दवा खिलाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण ब्लाक स्तर पर दिया जाएगा। साथ ही जिला व ब्लाक स्तर पर एनडीडी के संबंध में समन्वय बैठकें भी आयोजित की जाएंगी। अभियान के दिन शत-प्रतिशत उपस्थिति रखने का निर्देश दिया है। इसका प्रचार-प्रसार भी खूब किया जाना है। यह भी निर्देश है कि शिक्षक अपने सामने बच्चों को दवा चबाकर खिलवाएंगे।

🔵 पेट में कीड़ों से बच्चे होते एनीमिया व कुपोषण का शिकार

🔴 एक से 19 वर्ष तक के बच्चे व युवा को खिलाई जाएगी दवा ।

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