Wednesday, November 30, 2016

MEENA KI DUNIYA : मीना की दुनिया - रेडियो प्रसारण, एपिसोड - 32 । कहानी का शीर्षक - “दीपू और साबुन का किस्सा” क्लिक कर देखें ।

MEENA KI DUNIYA : मीना की दुनिया - रेडियो प्रसारण, एपिसोड - 32 । कहानी का शीर्षक - “दीपू और साबुन का किस्सा” क्लिक कर देखें ।

👉 मीना की दुनिया-रेडियो प्रसारण
👉 एपिसोड-32
👉 प्रसारण समय 11:15 से 11:30 तक
👉 दिनांक 30/11/2016

🔴 कहानी का शीर्षक- “दीपू और साबुन का किस्सा”

                मीना,राजू और दीपू किसी भाग दौड़ में लगे हुए हैं|
मीना- दीपू, अब तो मैं उंच-नीच का खेल खेलते-खेलते थक गयी हूँ|
दीपू- हाँ मीना, मैं भी थक गया हूँ| थोड़ी देर आराम करते हैं| तब तक मैं एक नया गाना सुनाता हूँ| सुनो-
“सबसे पहले होता है हाथ गीला, फिर ...ला ला..ƨƨƨ ....
मीना- वाह दीपू, साबुन वाल नया गाना, मैं इसे रेडियो पर भी सुना है|
दीपू- हाँ मीना, था न अच्छा गाना?
मीना- दीपू, गाना तो अच्छा था पर तुम तो बीच की एक लाइन भूल गए|
राजू- मैं बताता हूँ...सुनो-
‘सबसे पहले होता है हाथ गीला, फिर हाथ पे नाचे साबुन रंगीला|
हाथों को साफ करे छम छमा छम, क्योंकि साफ हाथ में है दम|’

दीपू- अरे! हाँ, साबुन वाली लाइन तो मैं भूल ही गया था|
मीना- ..पर दीपू, तुम जब भी कुछ भूल जाते हो तो अपने नाख़ून क्यों चबाते हो?....और अब फिर से नाख़ून चबा रहे हो|
मिठ्ठू ने तान छेड़ी, "नाखून चबा रहे हो मैल खा रहे हो|”
   राजू, दीपू से शर्त लगाता है कि अगर उसने ये गाना बिना कोई भी लाइन भूले सुना दिया तो वह अपने सारे कंचे दीपू को दे देगा|
मीना- राजू, बहिन जी कहती हैं, ‘शर्त लगाना बुरी बात है|’
राजू- मैं शर्त थोड़े ही लगा रहा हूँ,मैं तो बस किसी को इनाम दे रहा हूँ| अगर वो कल एक भी लाइन नही भूला तो....| “मुझे इनाम नही चाहिए राजू, पर कल मैं तुम्हें पूरा गाना सुनाऊंगा |” दीपू बोला, “ बस...राजू, अब मुझे भागना पड़ेगा|”
   दीपू अचानक से जब वहां से अपना पेट पकड के भगा तो मीना ने राजू से इसका कारण पूँछा|
राजू ने बताया, “....दीपू का पेट एक दम से ख़राब हो जाता है और फिर वो ऐसे ही भाग जाता है शौच करने|
मीना- कल उससे मिलके पूँछना पड़ेगा कि अचानक उसे क्या हो जाता है?
         लेकिन जब अगली शाम को मीना और राजू, दीपू के घर पहुंचे तो उन्हें कुछ और ही पता चला|
दीपू की माँ बताती है, “...वो तो कल शाम से ही बीमार है| उसके पेट में दर्द है|”
मीना- ओह! लेकिन चाची जी, दीपू तो पिछले हफ्ते भी बीमार पड़ गया था...हैं न|
दीपू की माँ- अब क्या बताऊँ मीना बेटी? मुझे तो उसकी सेहत को लेकर चिंता सताये जा रही है|
     दीपू की माँ, मीना और राजू को डॉक्टर बाबू को बुलाने को भेजती हैं|
जल्द ही मीना और राजू, डॉक्टर बाबू को लेकर दीपू के घर पहुंचे|
डॉक्टर बाबू, दीपू से उसकी तबियत का हाल पूंछते हैं|
दीपू- अभी भी पेट में दर्द हो रहा है डॉक्टर बाबू|
डॉक्टर बाबू- ये बताओ.... तुमने खाने में क्या-क्या खाया?
“डॉक्टर बाबू, यर तो घर में पकाया हुआ ताज़ा खाना ही खाता है|” दीपू की माँ ने कहा|
डॉक्टर बाबू- हूँ....दीपू, भूँख लगी है| कुछ हल्का-फुल्का खाओगे?
दीपू- बाद में.....अभी तो मुझे शौचालय जाना है|
         और जब दीपू शौचालय से बाहर निकला तो डॉक्टर बाबू, मीना और राजू तीनों ने देखा कि दीपू ने हाथ तो धोये लेकिन साबुन का इस्तेमाल नहीं किया|

डॉक्टर बाबू-दीपू, तुमने अपने हाथ बड़ी जल्दी धो लिए|
दीपू- जी वो...
डॉक्टर बाबू- भई, मैं तो अपने हाथ धोने से पहले उन्हें अच्छी तरह से रगड़ता हूँ ,साबुन से झाग बनाता हूँ, फिर आगे पीछे, उँगलियों के बीच में,हथेलियों पे नाखून रगड़ के....| लेकिन दीपू तुमने साबुन से हाथ क्यों नही धोये?
“मैंने पानी से हाथ धो तो लिए|” दीपू ने जबाब दिया|
डॉक्टर बाबू-नहीं दीपू, शौच के बाद सिर्फ साबुन से हाथ धोना काफी नहीं है|साबुन का इस्तेमाल जरुर करना चाहिये|...क्योंकि शौच के बाद हाथों में कीतानुहो सकते हैं, जो हमारे शरीर के अन्दर पहुँचकर हमें बीमार कर देते हैं|
“डॉक्टर बाबू, क्या वो कीटाणु पानी से नहीं धुलते?” दीपू ने पूँछा|
डॉक्टर बाबू- नहीं...इसीलिये साबुन का इस्तेमाल बहुत जरुरी है क्योंकि अगर साबुन का इस्तेमाल नहीं किया तो हाथ साफ होंगे ही नहीं और अगर गलती से भी ये गंदे हाथ हमारे मुंह में चले गए तो ये कीटाणु हमारे पेट में पहुँचकर हमें बीमार कर देंगे|
“दीपू, तुम तो अपने नाखून भी चबाते हो| हैं न मीना|” राजू ने जोड़ा|
मीना- हाँ राजू, दीपू, याद हैं न बहिन जी कहती हैं नाखूनों में जमी मेल में कीटाणु होते हैं और जब तुम नाख़ून चबाते हो तो यही कीटाणु तुम्हारे मुंह में चले जाते हैं|
डॉक्टर बाबू- ओह! तो ये बात है|..पता है इसे याद रखने के लिए मेरे पास एक गना भी है-
    “‘सबसे पहले होता है हाथ गीला, फिर हाथ पे नाचे साबुन रंगीला|
                  (दीपू भी साथ में गाता है)
     हाथों को साफ करे छम छमा छम, क्योंकि साफ हाथ में है दम|
मीना- अरे वाह! दीपू आज तो तुम हाथ धोने वाली लाइन भूले ही नहीं|
दीपू-मीना.... अब मुझे सब याद रहेगा| सिर्फ गाना ही नहीं.सचमुच साबुन से हाथ धोना भी|
दीपू की माँ- दीपू बेटा,डॉक्टर बाबू और बहिन जी की बात हमेशा याद रखना,अब साबुन से हाथ धोना कभी मत भूलना|
“राजू, देखना जब मैं ठीक हो जाऊंगा तो साथ में फिर से कंचे खेलेंगे|” दीपू ने कहा|
राजू- हाँ दीपू,अब तुम जल्दी ठीक हो जाओगे|

“ठीक हो जाओगे साबुन से कीटाणु भगाओगे|” मिठ्ठू चहका|

🔵 मीना, मिठ्ठू की कविता-

       जब भी निकलो शौच के बाद, लो पानी और साबुन |
       रगड़-रगड़ के दोनों हाथ, सफाई है अच्छा  गुण ||

🌕 आज का गाना-

          हाथ भिगो के लगा के साबुन,खूब बना ले झाग|
          रगड़-रगड़ धोले इनको तभी ये होंगे साफ -२
          रखना साफ अपने हाथ,  सीधी सी है बात|
                                      (सीधी बात..)
          हाथ से करते मेहनत(..मेहनत),हाथों में है ताकत(..ताकत)
          हाथ मिलाके दोस्त हैं बनते, हाथों में है किस्मत
          अरे! हाथों में है किस्मत| (....किस्मत)
          रखना साफ अपने हाथ,  सीधी सी है बात|
                                       (सीधी बात)
          हाथ पकडके  चलते, हाथ मिलाके गाते|
          हाथों से कॉपी में लिखते, हाथ से खाना खाते|
          अरे! हाथ से खाना खाते| (...खाते)
          रखना साफ अपने हाथ,  सीधी सी है बात|
          रगड़-रगड़ धोले इनको तभी ये होंगे साफ -२

🌑 आज का खेल- ‘अक्षरों की अन्त्याक्षरी’

शब्द-‘जीवन’

   👉 ज-  जामुन    
   👉  व-  विमान     
    👉 न-  नीम

🔴 आज के कहानी का सन्देश-

शौच के बाद सिर्फ साबुन से हाथ धोना काफी नहीं होता है| साबुन कीटाणुओं को दूर रखने के लिए बहुत जरूरी है|

MAN KI BAAT : प्राइमरी स्कूलों के बेहाल स्थिति पर माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जो टिप्पणी की उसका पालन होना ही चाहिए और उसे अमली जामा.......

MAN KI BAAT : प्राइमरी स्कूलों के बेहाल स्थिति पर माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जो टिप्पणी की उसका पालन होना ही चाहिए और उसे अमली जामा.......

🔴 बेहाल स्कूल

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे दरी या बोरे पर क्यों बैठते हैं। उनको बैठाने के लिए बेंच या कुर्सियों की व्यवस्था क्यों नहीं की जाती है। कोर्ट ने सरकार से प्राइमरी स्कूलों में शौचालय और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की जानकारी भी मांगी है। प्रमुख सचिव प्राथमिक शिक्षा को निर्देश दिया गया है कि वह अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्ययोजना तय करें और कोर्ट को उसकी जानकारी दें। सुप्रीम कोर्ट ने भी परिषदीय स्कूलों की बदहाली पर चिंता जताई है।

प्रदेश के स्कूलों में फर्नीचर मुहैया कराने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने 1700 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिसंबर 2014 में वित्त विभाग को भेजा था लेकिन, सरकार ने संसाधनों की कमी बताते हुए यह रकम मुहैया कराने से हाथ खड़े कर दिये। 65 हजार परिषदीय स्कूल बिजली की सुविधा से वंचित हैं। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अब इनमें से ऐसे 45 हजार स्कूलों को बिजली कनेक्शन दिलवाने की कवायद की जा रही है जिनमें मतदान केंद्र बनाये जाने हैं।

सूबे के प्राइमरी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था का यह हाल नया नहीं, पुराना है। शहरों में स्थित प्राइमरी स्कूलों की स्थिति फिर भी कुछ ठीक है पर गांवों का हाल बेहाल है। स्कूल के भवन वर्षो-वर्ष पुराने होने के कारण जर्जर हो चुके हैं। उनके रखरखाव की समुचित व्यवस्था नहीं। बरसात में टूटी छत से पानी गिरने के कारण कई स्कूलों में तो बच्चों की छुट्टी ही कर दी जाती है। कई स्कूल ऐसे भी हैं जहां धूप में पेड़ की छांव तले पढ़ाई करवाई जाती है। कहीं बच्चों की तुलना में शिक्षकों की संख्या बहुत कम है तो कहीं एक ही शिक्षक के भरोसे पूरा स्कूल चल रहा है। दूरदराज के इलाकों में तो शिक्षक स्कूल जाते तक नहीं। शौचालय व पेयजल व्यवस्था भी न के बराबर है। इन पुरातन समस्याओं का अब तक निदान नहीं हो पाया है। चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों के नेता प्राइमरी स्कूलों का कायाकल्प कर देने का वादा तो करते हैं पर कुर्सी पाते ही सब भूल जाते हैं। स्थिति इतनी विषम है कि शीर्ष अदालतों को भी हस्तक्षेप करना पड़ रहा है।

राज्य सरकारों को बताना पड़ रहा है कि प्राइमरी स्कूल में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना आपकी जिम्मेदारी है। किसी प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के लिए इससे शर्मनाक स्थिति कुछ भी नहीं हो सकती और इसका हल सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
- दैनिक जागरण सम्पादकीय पृष्ठ से ।

व्यक्गित विचार : मुझे लगता कि प्राइमरी स्कूलों के मूलभूत रख - रखाव की सुविधाओं के साथ प्रदेश सरकार को प्रत्येक प्राइमरी स्कूलों के लिए कम से एक चपरासी/चौकीदार की स्थानीय स्तर पर भी नियुक्त करने के तरफ कदम उठाना चाहिए जिससे विद्यालयों की सुरक्षा विद्यालय के बन्द होने बाद भी सम्भव हो सके ।




CERTIFICATE, ONLINE SYSTEM : सर्टिफिकेट खो जाने के झंझट और इसके फर्जीवाड़े से मिलेगा छुटकारा, सर्टिफिकेट के ऑनलाइन लॉकर की कवायद शुरू, निर्देश जारी

CERTIFICATE, ONLINE SYSTEM : सर्टिफिकेट खो जाने के झंझट और इसके फर्जीवाड़े से मिलेगा छुटकारा, सर्टिफिकेट के ऑनलाइन लॉकर की कवायद शुरू, निर्देश जारी

नई दिल्ली । सर्टिफिकेट खो जाने के झंझट और इसके फर्जीवाड़े को रोकने के इरादे से इनके ऑनलाइन लॉकर शुरू करने की कवायद शुरू कर दी गई है। केंद्र सरकार ने ‘नेशनल एकेडेमिक डिपोजिट्री’ (एनएडी) के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को अधिकृत संस्थान घोषित कर दिया है। इसके बाद यूजीसी ने देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों को यह व्यवस्था शुरू करने के लिए जरूरी तैयारियां करने का निर्देश जारी कर दिया है।

मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रलय ने एकेडेमिक डिपोजिट्री व्यवस्था के लिए विवि अनुदान आयोग को अधिकृत किया है। अब यह आने वाले कुछ दिनों में नेशनल एकेडमिक डिपोजिट्री के गठन के लिए दो एजेंसियों के साथ त्रिपक्षीय समझौता कर सकेगा। इसके साथ ही यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों को इस संबंध में व्यवस्था शुरू करने का निर्देश भी जारी कर दिया है। नोडल एजेंसी के तौर पर यूजीसी ने इन्हें यह भी कहा है कि सभी संस्थान दो डिजिटल रिपोजिट्री एनएसडीएल और सीएसडीएल में से किसी एक का चयन कर उसके साथ अपना समझौता (सर्विस लेवल एग्रीमेंट) कर लें। इन्हें अपने संस्थान के अंदर एक नोडल अधिकारी घोषित कर एकेडेमिक डिपोजिट्री सेल गठित करने और उसके संचालन को शुरू कराने को भी कहा है।

एनएसडीएल और सीएसडीएल पहले से ही भारतीय सेक्यूरिटी एक्सचेंज बोर्ड (सेबी) में रजिस्टर्ड डिपोजिट्री के रूप में काम कर रही हैं। यूजीसी की ओर से इसके सचिव जसपाल एस संधु ने बीते बुधवार को सभी केंद्रीय विवि राज्य विवि और केंद्रीय मदद से चलने वाले डीम्ड विश्वविद्यालयों के अलावा सभी राष्ट्रीय महत्व के शैक्षणिक संस्थानों और भारतीय प्रबंधन संस्थानों को इस संबंध में पत्र लिखा है। एचआरडी मंत्रलय की कोशिश है कि यह सुविधा इन संस्थानों में अगले शैक्षणिक सत्र से ही लागू हो जाए। इसके तहत छात्रों को इन संस्थानों से पास होते ही ऑनलाइन सर्टिफिकेट मिल सकेगा। साथ ही नौकरी या आगे की पढ़ाई के लिए छात्र के सर्टिफिकेट की सत्यता की जांच भी आसानी से हो सकेगी। यूजीसी ने एनएसडीएल और सीएसडीएल को पूरी व्यवस्था इंटरओपरेबल बनाने को कहा है ताकि किसी भी वक्त संस्थान अगर किसी एक एजेंसी से अपना समझौता खत्म कर दूसरी के साथ शुरू करना चाहे तो उसे समस्या नहीं हो।

BUDGET, PRIMARY SCHOOL : संसाधनों का रोना और टाट-पट्टी पर बैठना, दो वर्ष पूर्व हुई थी परिषदीय स्कूलों में फर्नीचर मुहैया कराने की पहल, वित्त विभाग ने बजट आवंटित करने से खड़े कर दिए थे हाथ

PRIMARY SCHOOL : संसाधनों का रोना और टाट-पट्टी पर बैठना, दो वर्ष पूर्व हुई थी परिषदीय स्कूलों में फर्नीचर मुहैया कराने की पहल, वित्त विभाग ने बजट आवंटित करने से खड़े कर दिए थे हाथ

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : परिषदीय स्कूलों में बच्चों के टाट-पट्टी पर बैठने पर हाईकोर्ट ने यूं ही नहीं एतराज जताया है। बेसिक शिक्षा पर साल दर साल अरबों रुपये खर्च करने के बाद भी सरकार परिषदीय स्कूलों में टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ने वाले बच्चों के लिए फर्नीचर की व्यवस्था नहीं कर पाई है।

दो साल पहले तत्कालीन बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी ने इस दिशा में पहल की थी। उस वक्त प्रदेश के सिर्फ 11 हजार उच्च प्राथमिक स्कूलों में सर्व शिक्षा अभियान के तहत फर्नीचर मुहैया कराए गए थे। बचे हुए 35 हजार उच्च प्राथमिक स्कूलों और 1,13,000 प्राथमिक विद्यालयों में बच्चे टाट-पट्टी पर ही बैठकर पढ़ाई करते हैं। दिसंबर 2014 में विभाग के वरिष्ठ अफसरों के साथ बैठक करते हुए चौधरी ने निर्देश दिया था कि अगले यानी शैक्षिक सत्र 2015-16 से परिषदीय स्कूलों के बच्चे टाट-पट्टी पर नहीं, मेज-कुर्सी पर बैठकर पढ़ाई करेंगे।

बैठक में लिए गए इस फैसले के क्रम में बेसिक शिक्षा विभाग ने 1,48,000 परिषदीय स्कूलों में फर्नीचर मुहैया कराने के लिए वित्तीय वर्ष के बजट में 1700 करोड़ रुपये आवंटित करने की मांग की थी। बेसिक शिक्षा निदेशालय ने दिसंबर 2014 में ही इस आशय का प्रस्ताव शासन को भेजा था लेकिन वित्त विभाग ने संसाधनों का रोना रोते हुए यह रकम मुहैया कराने से हाथ खड़े कर दिए थे।

चुनाव के बहाने 45 हजार स्कूलों को मिलेगी बिजली : प्रदेश के 1.59 लाख परिषदीय स्कूलों में से 65 हजार अब भी बिजली की सुविधा से वंचित हैं। विधानसभा चुनाव के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के 80 हजार परिषदीय स्कूलों में मतदान केंद्र बनाने का फैसला किया है। जिन 80 हजार स्कूलों में मतदान केंद्र बनाये जाने हैं, उनमें से 45 हजार विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें बिजली कनेक्शन नहीं हैं। प्रत्येक स्कूल में बिजली कनेक्शन के लिए 7000 रुपये और वायरिंग के लिए 17 हजार रुपये खर्च होंगे। इस हिसाब से 45 हजार स्कूलों के लिए 108 करोड़ रुपये की दरकार है। लेकिन स्कूलों को बिजली मुहैया कराने के लिए अनुपूरक बजट में सिर्फ 60 करोड़ रुपये ही आवंटित किए गए हैं। ऐसे में बेसिक शिक्षा विभाग की प्राथमिकता पहले सभी 45 हजार स्कूलों में बिजली का कनेक्शन कराना है। बची धनराशि स्कूलों में वायरिंग के लिए उपलब्ध कराई जाएगी।

EXAMINATION : अभ्यर्थियों में टीईटी परीक्षा से वंचित होने का डर, बीटीसी - 2013 तीसरे सेमेस्टर की परीक्षा की मांग

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YOGA, SUPREME COURT : योग की शिक्षा पर सरकार तीन महीने में ले फैसला, सुप्रीमकोर्ट ने कक्षा 1 से 8 तक योग अनिवार्य करने की मांग संबंधी याचिकाएं निपटाई

YOGA, SUPREME COURT : योग की शिक्षा पर सरकार तीन महीने में ले फैसला, सुप्रीमकोर्ट ने कक्षा 1 से 8 तक योग अनिवार्य करने की मांग संबंधी याचिकाएं निपटाई

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह तीन महीने के भीतर फैसला ले कि वह कक्षा एक से आठ तक के बच्चों के लिए स्कूलों में योग अनिवार्य करना चाहती है कि नहीं। कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ ही स्कूलों में योग की शिक्षा अनिवार्य किए जाने संबंधी याचिकाएं निपटा दीं। मंगलवार को न्यायमूर्ति मदन बी. लोकूर की अध्यक्षता वाली पीठ ने वकील जेसी सेठ और वकील अश्वनी उपाध्याय की ओर से दाखिल दोनों याचिकाएं निपटा दीं।

कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह याचिकाओं को ज्ञापन मानते हुए तीन महीने में उन पर फैसला ले। पीठ ने यह भी कहा कि अगर इसके बाद याचिकाकर्ताओं को कोई शिकायत रहती है तो वे फिर कोर्ट आ सकते हैं। जेसी सेठ और अश्वनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में दो जनहित याचिकाएं दाखिल कर मांग की थी कि कक्षा एक से आठवीं तक के पाठ्यक्रम में योग को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

उपाध्याय ने अपनी याचिका में विभिन्न मौलिक अधिकारों की दुहाई देते हुए कहा गया था कि मानव संसाधन मंत्रलय, एनसीईआरटी, एनसीटीई और सीबीएसई को निर्देश दिए जाएं कि वे एक से लेकर आठवीं तक के छात्रों के लिए योगाभ्यास और स्वास्थ्य शिक्षा की पाठ्य पुस्तक तैयार करे। कहा गया था कि राष्ट्रीय पाठ्यक्रम फ्रेमवर्क 2005 कहता है कि योग प्राथमिक शिक्षा का आवश्यक विषय है। इसे अन्य विषयों के साथ बराबरी का दर्जा दिए जाने की जरूरत है। मांग थी कि योग को राष्ट्रीय पाठ्यक्रम फ्रेमवर्क 2005 और शिक्षा के अधिकार कानून 2009 की धारा 7 (6) के तहत अधिसूचित किया जाना चाहिए।

GOVERNMENT ORDER, LEAVE, PUBLIC HOLIDAY : वर्ष 2017 के सार्वजनिक अवकाशों के सम्बन्ध जारी आदेश देखें, साथ ही नए साल में कर्मचारियों को होगा 12 सार्वजनिक अवकाशों का घाटा, 38 सार्वजनिक अवकाशों में से 12 छुट्टियां सैटरडे और संडे को पड़ेंगी से सम्बन्धित खबर भी देखें ।

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📌  LEAVE, HOLIDAY : नए साल में कर्मचारियों को होगा 12 सार्वजनिक अवकाशों का घाटा, 38 सार्वजनिक अवकाशों में से 12 छुट्टियां सैटरडे और संडे को पड़ेंगी, साल में चार मौके ऐसे भी आएंगे जब कर्मचारियों को तीन-तीन दिन की एक साथ छुट्टियां मिलेंगी, हफ्ते में छ: दिन कार्य करने वालों को ज्यादा छुट्टियां , यहीं क्लिक कर देखें ।

FRAUD, BTC COLLEGE : शिकंजा, अब नहीं चलेगा एक डिग्री से कई कालेजों में प्रवक्ता, प्रदेश में बेसिक टीचर्स ट्रेनिंग यानी बीटीसी के निजी कॉलेज लगातार खुलते जा रहे हैं, लेकिन वहां पर पठन-पाठन का स्तर का उसी रफ्तार से गिर रहा

FRAUD, BTC COLLEGE : शिकंजा, अब नहीं चलेगा एक डिग्री से कई कालेजों में प्रवक्ता, प्रदेश में बेसिक टीचर्स ट्रेनिंग यानी बीटीसी के निजी कॉलेज लगातार खुलते जा रहे हैं, लेकिन वहां पर पठन-पाठन का स्तर का उसी रफ्तार से गिर रहा

इलाहाबाद (जेएनएन)। एक प्रमाणपत्र से कई मेडिकल स्टोर कई चलाने की बातें अब पुरानी हो चली हैं। शिक्षा महकमे में बड़ी संख्या में ऐसे प्रवक्ता हैं, जिन्होंने कई कॉलेजों में अपना पंजीकरण करा रखा है। ताज्जुब यह है कि सभी कॉलेजों से उन्हें तय रकम भी मिल रही है और उन्हें कहीं जाना भी नहीं पड़ रहा। यह मामले जानकारी में आने के बाद फर्जीवाड़े पर कड़ा अंकुश लगने जा रहा है। सभी कॉलेजों से शिक्षकों का आधार कार्ड मांगा गया है, इसे अपलोड कराने की तैयारी है। इस कदम से हड़कंप है। कॉलेज प्रबंधक रिकॉर्ड देने में आनाकानी कर रहे हैं।

प्रदेश में बेसिक टीचर्स टे्रनिंग यानी बीटीसी के निजी कॉलेज लगातार खुलते जा रहे हैं, लेकिन वहां पर पठन-पाठन का स्तर का उसी रफ्तार से गिर रहा है। तमाम हिदायतों के बाद भी सुधार न होने पर पाठ्यक्रम में बदलाव हुए। ऐसा पाठ्यक्रम बनाया गया कि प्रशिक्षुओं को पढऩा और शिक्षकों को पढ़ाना ही होगा। इसके बाद भी शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, बल्कि प्रशिक्षु सेमेस्टर परीक्षाओं में ही फेल होने लगे। हाल में ही बीटीसी 2013 का परीक्षा परिणाम इसका ताजा उदाहरण है। इधर अफसरों ने एनसीटीई से संपर्क करके उन कारणों की पड़ताल की कि आखिर बीटीसी कॉलेजों में पढ़ाई क्यों नहीं हो पा रही है। इसमें यह सामने आया कि एक ही प्रवक्ता कई कॉलेजों में पंजीकृत है और उसका पढ़ाई से कोई लेना-देना नहीं है। इन्हीं कथित प्रवक्ताओं के बलबूते बड़ी संख्या में निजी कॉलेज चल रहे हैं।

इस पर सख्त अंकुश लगाने के लिए यह योजना बनी कि सभी कॉलेजों के प्रवक्ताओं से आइडी यानी पहचान पत्र लेकर उनका आधार कार्ड एनसीटीई की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाए तो वह जहां भी पंजीकृत होंगे तस्वीर सामने आ जाएगी। इसी योजना के तहत प्रवक्ताओं का रिकॉर्ड मांगा गया, लेकिन अभी तक गिने चुने कॉलेजों ने ही मुहैया कराया है।

अधिकांश कॉलेज इसे देने में आनाकानी कर रहे हैं। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के रजिस्ट्रार नवल किशोर ने बताया कि अभी कुछ कॉलेजों ने ही सूचनाएं भेजी हैं। सभी को जल्द रिपोर्ट भेजने को कहा गया है।

🌕 इस कदम का यह असर

1. योग्यता रखने वाले नए युवाओं को कॉलेजों में पढ़ाने का मिलेगा मौका।
2. तमाम निजी कॉलेज बंदी के कगार पर होंगे, क्योंकि एक शिक्षक कई पंजीकृत।
3. शैक्षिक प्रपत्र एवं फोटो एनसीटीई की वेबसाइट पर आते ही पोल खुल जाएगी।
4. अफसरों ने कॉलेजों को 30 नवंबर तक आधार से लिंक करने को कहा।

🌑 प्रदेश में बीटीसी कॉलेज व शिक्षक

संस्थान संख्या शिक्षक
डायट 63 1008
निजी कॉलेज 1422 11376
कुल 1485 12384

नोट : जिन कॉलेजों में प्रशिक्षुओं की संख्या 100 है वहां 16 एवं जहां 50 है वहां पर आठ शिक्षक रखे गए हैं।

🔴 प्रशिक्षुओं का टीईटी रिजल्ट

वर्ष   उत्तीर्ण प्रतिशत

2011  51.06
2013  14.22
2014  24.99
2015  17.00

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