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एक छत के नीचे 'प्राइमरी का मास्टर' से जुड़ी शिक्षा विभाग की समस्त सूचनाएं एक साथ

44 फीसद पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक ही नहीं : जो प्राथमिक विद्यालय हैं वहां इसके लिए दबाव बनाये जाने लगते हैं लेकिन शिक्षा विभाग के अफसरों को यह नजर नहीं आता

44 फीसद पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक ही नहीं : जो प्राथमिक विद्यालय हैं वहां इसके लिए दबाव बनाये जाने लगते हैं लेकिन शिक्षा विभाग के अफसरों को यह नजर नहीं आता

कानपुर : शिक्षा सत्र शुरू होते ही दिल्ली से देहाती क्षेत्र के छोटे से छोटे गांव तक सर्व शिक्षा अभियान का बाजा बजाया जाने लगता है। बच्चों को घर से स्कूल पहुंचाने की बातें कहीं जाने लगती हैं। शहरी क्षेत्र में जो प्राथमिक विद्यालय हैं वहां इसके लिए दबाव बनाये जाने लगते हैं लेकिन शिक्षा विभाग के अफसरों को यह नजर नहीं आता कि अपने जनपद के 44 फीसदी पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में तो शिक्षक ही नहीं हैं। इन विद्यालयों में जो छात्र-छात्राएं हैं वे पढ़ाई के लिए उसी परिसर में मौजूद दूसरे स्कूल के शिक्षकों के भरोसे हैं। यह स्थिति तब है जबकि करीब-करीब ये सभी नगरीय क्षेत्र के विद्यालय हैं।

पूर्व माध्यमिक विद्यालय शास्त्री नगर में पढ़ने वाले बच्चों को प्राथमिक विद्यालय कौशलपुरी की शिक्षिका संबद्धता के तहत पढ़ाती हैं। पिछले कई वर्ष से जूनियर हाईस्कूल में शिक्षकों की कमी है। नगर क्षेत्र में चार खंडों के अंतर्गत आने वाले 52 जूनियर हाईस्कूल (पूर्व माध्यमिक विद्यालय) में से 23 में शिक्षक ही नहीं हैं। ऐसा नहीं है कि यहां शिक्षक गायब रहते हैं, असलियत तो यह है कि इन स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती ही नहीं की गई है। इनका संचालन प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को संबद्ध करके किया जा रहा है। ऐसे स्थिति में न तो पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के बच्चे पढ़ पाते हैं न ही परिषदीय विद्यालयों के क्योंकि शिक्षक को दोनों ही ओर भागना पड़ता है। शिक्षक प्राथमिक विद्यालय के होते हैं, इसलिए वे अपने स्कूल के प्रति ज्यादा ध्यान देते हैं क्योंकि उनकी पहली जिम्मेदारी उन स्कूलों की ओर होती है। इसलिए पूर्व माध्यमिक के इन विद्यालयों की पढ़ाई पर असर पडता है।

अफसर भी इन विद्यालयों की ओर से पूरी तरह लापरवाह हैं। ये लोग इन विद्यालयों की कोई रिपोर्ट तैयार करके शासन को नहीं भेजते। वहीं शासन से जब कोई वरिष्ठ अफसर शहर आता है तो उसे उसी विद्यालय का निरीक्षण कराया जाता है जहां सारी व्यवस्थाएं ठीक हों। जहां अव्यवस्थाओं का अंबार है, वहां कोई झांकने तक नहीं जाता।

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इन विद्यालयों में नहीं हैं शिक्षक

पूर्व माध्यमिक विद्यालय जुगैया गंगापुर, निराला नगर, कन्या परमपुरवा, कन्या जूही, कन्या नौबस्ता मछरिया, बिनगवां, अर्रा, लालपुर, नौबस्ता, दादानगर, बर्रा, कन्या किदवई नगर, सदर बाजार गुजैनी, डिप्टी पड़ाव गुजैनी, नौघड़ा, कराची खाना, सजारी, छतमरा, चकेरी, कुलगांव, रूमा, शेखपुर, टटिया।

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फिलहाल पद सृजन का कोई आदेश शासन की ओर से नहीं है। प्रमोशन या ट्रांसफर की जो प्रक्रिया है। उनमें कई ऐसे मामले हैं जो कोर्ट की वजह से लंबित हैं। जो व्यवस्था है उसके अनुरूप विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है।
- विष्णुप्रताप सिंह, बीएसए।

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  1. 44 फीसद पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक ही नहीं : जो प्राथमिक विद्यालय हैं वहां इसके लिए दबाव बनाये जाने लगते हैं लेकिन शिक्षा विभाग के अफसरों को यह नजर नहीं आता
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