Friday, July 31, 2015

मन की बात : शिक्षकों पर प्रवेश के लिए बनने वाले दबाव से उपजी स्थिति शिक्षा व्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं, यह नियमों के जाल में लिपटी शिक्षा व्यवस्था की एक नजीर भर है…

बचपन तो नहीं छीन रहा..शिक्षा का अधिकार क़ानून

स्कूल के सामने से गुजरते कारवां को निहारते स्कूली बच्चे।

शिक्षा का अधिकार क़ानून 6 से 14 साल तक की उम्र के बच्चों को शिक्षा का हक़ दिलाने का आश्वासन देना है। लेकिन इसके कुछ प्रावधान बाल अधिकारों का हनन करते दिखाई देते हैं। इस क़ानून के तहत पहली कक्षा में प्रवेश पाने वाला बच्चा अगले साल स्वतः दूसरी कक्षा में क्रमोन्नत हो जाता है।

कम उम्र में बच्चों का स्कूल में नामांकन होने के कारण बहुत सारे बच्चे छह साल की उम्र में ही तीसरी और चौथी कक्षा में बैठने को मजबूर हैं। उनको अपना नाम बताने में झिझक महसूस होती है। अपना नाम लिखने में परेशानी होती है…। ऐसे में वे तीसरी-चौथी के स्तर की किताबों के साथ क्लास में कैसा महसूस करते हैं..यह तो उनके संबंधित शिक्षक ही बता सकते हैं।

लेकिन शिक्षकों पर प्रवेश के लिए बनने वाले दबाव से उपजी स्थिति शिक्षा व्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं है। यह नियमों के जाल में लिपटी शिक्षा व्यवस्था की एक नजीर भर है…ऐसे किस्से सैकड़ों-हज़ारों हैं। ऐसी स्थिति देखकर लगता है कि शिक्षा का अधिकार दिलाने की हड़बड़ी में बने नियम ही बच्चों की प्रगति में दीवार बनकर खड़े हो गए हैं।

नीतियों का निर्माण करने वाले और उसे लागू करने वाले अपनी डफली, अपना राग वाले फार्मूले पर चल रहे हैं….और बच्चे रोज़ाना एक नई मुसीबत का सामना कर रहे हैं।

आभार : बृजेश सिंह 

'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' पर दिखाई फिल्म : क्षेत्रीय प्रचार निदेशालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने स्वच्छ भारत मिशन पर एक जागरूकता कार्यक्रम तथा प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का किया आयोजन

'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' पर दिखाई फिल्म : क्षेत्रीय प्रचार निदेशालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने स्वच्छ भारत मिशन पर एक जागरूकता कार्यक्रम तथा प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का किया आयोजन

लखीमपुर : क्षेत्रीय प्रचार निदेशालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय की लखीमपुर इकाई सरस्वती विद्या मंदिर बालिका इंटर कॉलेज में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं तथा स्वच्छ भारत मिशन पर एक जागरूकता कार्यक्रम तथा प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया।

इससे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर सभी ने उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। कार्यक्रम का प्रारंभ बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ पर फिल्म दिखाकर किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. वीबी राम ने कहा कि देश में लगातार लड़कों के अनुपात में लड़कियों की घटती हुई संख्या को ध्यान में रखते हुए हमारे प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम की शुरुआत 22 जनवरी को पानीपत, हरियाणा से की।

सबसे अधिक चौकाने वाला एवं ¨चताजनक तथ्य है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शहरों की अपेक्षा बालिकाओं का अनुपात अधिक तेजी से गिरा है।

इस विषय पर लोगों को गंभीर ¨चतन करना होगा। विशिष्ट अतिथि के रूप में डीडी न्यूज, नई दिल्ली से आए हुए सहायक निदेशक आईआईएस सौरभ कुमार तथा गौरव खरे ने अपने अनुभव बच्चों व टीचरों से शेयर किए। क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी, आजमगढ़ राजीव चर्तुवेदी ने कहा कि अब बालिकाओं की लगातार कम हो रही संख्या का दुष्प्रभाव दिखने लगा है। इस विषय पर जागरूकता के कार्य को मीडिया काफी प्रभावशाली ढंग से आगे बढ़ा सकता है। प्रभारी अधिकारी राजेश बरनवाल ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए काफी जानकारी इस विषय पर दी। कार्यक्रम में स्वच्छ भारत मिशन पर लायंस क्लब के सचिव आर्येंद्र पाल ¨सह ने स्वच्छता के महत्व के बारे में काफी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। कॉलेज प्रबंधक डॉ. राकेश माथुर ने भी अपने विचार सबके सामने रखे।

कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर देकर 23 बालिकाओं ने पुरस्कार जीते। इन्हें विभाग की ओर से प्रमाण-पत्र भी दिए गए।

     खबर साभार : दैनिकजागरण

वरिष्‍ठ परामर्शदाता के एक रिक्‍त पद को भरे जाने के सम्‍बन्‍ध में आवेदन पत्र आमंत्रित किया जाना शासनादेश जारी |

वरिष्‍ठ परामर्शदाता के एक रिक्‍त पद को भरे जाने के सम्‍बन्‍ध में आवेदन पत्र आमंत्रित किया जाना शासनादेश जारी |

वित्तीय वर्ष 2015-2016 के लिये अनुपूरक अनुदान की मांगों के प्रस्‍ताव उपलब्‍ध कराये जाने के सम्‍बन्‍ध में शासनादेश जारी |

वित्तीय वर्ष 2015-2016 के लिये अनुपूरक अनुदान की मांगों के प्रस्‍ताव उपलब्‍ध कराये जाने के सम्‍बन्‍ध में शासनादेश जारी |

राजकीय विभागों के शिक्षकों को राजकीय कर्मचारियों की भॅाति ए0सी0पी0 दिये जाने से सम्बन्धित मुख्य सचिव समिति को संदर्भित प्रकरण पर समिति द्वारा दी गयी संस्तुतियों पर लिये गये निर्णय के कार्यान्वयन के सम्बन्ध में शासनादेश जारी |

राजकीय विभागों के शिक्षकों को राजकीय कर्मचारियों की भॅाति ए0सी0पी0 दिये जाने से सम्बन्धित मुख्य सचिव समिति को संदर्भित प्रकरण पर समिति द्वारा दी गयी संस्तुतियों पर लिये गये निर्णय के कार्यान्वयन के सम्बन्ध में शासनादेश जारी |

शौचालय विहीन प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शौचालय निर्माण एवं अक्रियाशील शौचालयों के की मरम्मत/निर्माण की स्थिति वेबसाइट पर अपलोड कराने के सम्बन्ध में आदेश जारी |

शौचालय विहीन प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शौचालय निर्माण एवं अक्रियाशील शौचालयों के की मरम्मत/निर्माण की स्थिति वेबसाइट पर अपलोड कराने के सम्बन्ध में आदेश जारी |

परिषदीय विद्यालयों में क्रियाशील इण्डिया मार्का-2 हैण्डपम्प/स्वच्छ पेयजल सुविधा उपलब्ध कराये जाने हेतु रिबोर/खराब हैण्डपम्प को सही कराया जाए और जरूरत पर नवीन हैण्डपम्प गलवाये जाने हेतु बजट जारी के सम्बन्ध में आदेश जारी |

परिषदीय विद्यालयों में क्रियाशील इण्डिया मार्का-2 हैण्डपम्प/स्वच्छ पेयजल सुविधा उपलब्ध कराये जाने हेतु रिबोर/खराब हैण्डपम्प को सही कराया जाए और जरूरत पर नवीन हैण्डपम्प गलवाये जाने हेतु बजट जारी के सम्बन्ध में आदेश जारी |

बी0टी0सी0 (BTC) 2014 ऑनलाइन आवेदन करने से पूर्व दिशा निर्देश ध्यान पूर्वक पढ़ें लें : शासनादेश देखें ; आवेदन यहीं क्लिक कर करें |

 

बी टी सी २ ० १ ४   
परीक्षा नियामक प्राधिकारी, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश


STEP- 1 आवेदन पत्र भरने हेतु महत्वपूर्ण दिशा निर्देश 

ऑनलाइन आवेदन करने से पूर्व दिशा निर्देश ध्यान पूर्वक पढ़ लें एवं रजिस्ट्रेशन के प्रारूप को भी ध्यानपूर्वक पढ़ लें| समस्त प्रविष्टियाँ अंग्रेजी भाषा में ही मान्य होंगी|

अंतिम तिथि 
12/08/2015 (6PM)
STEP- 2 ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) करें

अंतिम तिथि 
14/08/2015 (6PM)
STEP- 3 आवेदन शुल्क जमा करने हेतु बैंक (SBI) 
की वेबसाइट का लिंक 

अंतिम तिथि 
17/08/2015 (6PM)
STEP- 4 आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कर आवेदन पत्र प्रिंट करें 

अंतिम तिथि 
24/08/2015 (6PM)
रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) विवरण प्रिंट करें 

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शैक्षिक सत्र 2015-16 में राष्ट्रीयकृत निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों के एफ0ओ0आर0 डेस्टीनेशन आपूर्ति एवं नि:शुल्क वितरण के सम्बन्ध में : यहीं क्लिक कर डाउनलोड करें |

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~शैक्षिक सत्र 2015-16 में निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों एवं निःशुल्क कार्यपुस्तकों की आपूर्ति एवं वितरण के सम्बन्ध में आदेश जारी : क्लिक कर देखें |

सहायक अध्यापक की नौकरी कर रहे प्रथम और द्वितीय बैच के शिक्षामित्रों को पगार दिए जाने का रास्ता साफ : जुलाई माह में वेतन सूची में शामिल किया जा रहा

सहायक अध्यापक की नौकरी कर रहे प्रथम और द्वितीय बैच के शिक्षामित्रों को पगार दिए जाने का रास्ता साफ : जुलाई माह में वेतन सूची में शामिल किया जा रहा

फतेहपुर : सहायक अध्यापक की नौकरी कर रहे प्रथम और द्वितीय बैच के शिक्षामित्रों को पगार दिए जाने का रास्ता साफ हो गया है। शैक्षिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन कराने में जुटे विभाग ने रिपोर्ट आने के बाद दोनों बैच के अध्यापकों की वेतन सूची जारी कर दी है। प्रथम बैच के शिक्षामित्र 11 माह से वेतन नहीं पा रहे थे मानदेय पहले ही बंद हो चुका था। जिससे वह आर्थिक संकट झेल रहे थे। शिक्षामित्रों के संगठन विभाग पर लगातार दबाव बनाए हुए थे। वेतन देने को लेकर बीएसए से गुहार लगा रहे थे।

प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह भदौरिया ने बीएसए को धन्यवाद ज्ञापित किया। बीएसए विनय कुमार ने बताया कि प्रथम बैच के 215, द्वितीय बैच के 58 शिक्षामित्रों के सत्यापन आ चुके हैं। जिनको जुलाई माह में वेतन सूची में शामिल किया जा रहा है |

      खबर साभार : दैनिकजागरण

मिड-डे मील में दूध का विकल्प……दलिया और फल ; दूध से बच्चों के बीमार पड़ने पर अफसर भी चिंतित,विभाग को भेजे गए कई सुझाव : योजना में बदलाव के लिए सरकार पर भी लगातार बढ़ रहा दबाव

मिड-डे मील में दूध का विकल्प……दलिया और फल ; दूध से बच्चों के बीमार पड़ने पर अफसर भी चिंतित,विभाग को भेजे गए कई सुझाव : योजना में बदलाव के लिए सरकार पर भी लगातार बढ़ रहा दबाव

लखनऊ : कैंट स्थित तोपखाना बाजार में कैंटोनमेंट बोर्ड की ओर से संचालित माध्यमिक एवं प्राइमरी पाठशाला में बुधवार को मिड-डे-मील में दूध पीने के बाद 77 से अधिक बच्चे बीमार हो गए थे। घटना के बाद से दोनों स्कूलों के बच्चों में दहशत है। एमडीएम भेजने वाली संस्था अक्षय पात्र ने गुरुवार को सब्जी रोटी भेजी थी, लेकिन बच्चों ने खाने से इनकार कर दिया। शिक्षकों के समझाने में कुछ ही बच्चे मिड-डे-मील लेने को तैयार हुए।

मिड-डे-मील में दूध दिए जाने के बाद बच्चों के बीमार पड़ने से सभी सहमे हुए हैं। इस योजना में बदलाव के लिए सरकार पर भी लगातार दबाव बढ़ रहा है। मिड-डे-मील बांटने वाले एनजीओ, ग्राम प्रधान और शिक्षकों से लेकर कई डीएम तक ने सरकार को इस बारे में लिखा है। उन्होंने दूध के विकल्प के तौर पर फल अथवा कुछ अन्य पौष्टिक आहार देने के सुझाव भी दिए हैं।

एमडीएम योजना में दूध बांटने की शुरुआत इसी साल 15 जुलाई से हुई है। इस योजना पर पहले ही शिक्षकों की ओर से कई आशंकाएं जताई गई थीं। पहले दिन दूध बांटा गया तो लखीमपुर में दो दर्जन बच्चे बीमार पड़ गए। इसे ओवर ईटिंग बताते हुए बदलाव किया गया कि बुधवार के मेन्यू में कोफ्ता और दूध एक साथ न दिया जाए। बच्चों को स्कूल आते ही पहले दूध दे दिया जाए। उसके बाद दोपहर के खाने में कोफ्ता दिया जाए। इसके बावजूद हर हफ्ते जिलों से मिलावटी दूध मिलने और कई तरह की शिकायतें आ रही हैं।

कुछ आए हुये सुझाव:

√मिड डे मील की कन्वर्जन कॉस्ट बढ़ाई जाए। एक दिन 200 मिली दूध देने के लिए नौ रुपये अतिरिक्त चाहिए।

√पर्याप्त मात्रा में दूध उपलब्ध करवाने की व्यवस्था खुद सरकार करे

√ दूध की जगह फल, बिस्किट, दलिया या कोई अन्य पौष्टिक आहार दिया जाए

√स्कूलों और एनजीओ पर ही जिम्मेदारी दी है तो उन्हें ही यह तय करने का हक दिया जाए कि क्या पौष्टिक आहार दिया जाए

दर्जन भर डीएम ने भेजीं चिट्ठियां

लखनऊ में 29 जुलाई को हुई घटना के बाद से तो सभी और ज्यादा सहम गए हैं। ज्यादातर जिलों में एनजीओ और ग्राम प्रधानों ने दूध देने में असमर्थता जताई है। उन्होंने इस बारे में जिलों के डीएम और बीएसए को चिट्ठी लिखी है। जिलाधिकारियों ने इन चिट्ठियों और सुझावों को मिड डे मील अथॉरिटी और बेसिक शिक्षा विभाग के पास भेजा है। करीब दर्जन भर जिलाधिकारियों ने ये चिट्ठियां महकमे को भेजी हैं। कानपुर की जिलाधिकारी रौशन जैकब ने ऐसी कई चिट्ठियां भेजी हैं। बाकी अफसर भी दूध वितरण में असमर्थता जता रहे हैं लेकिन सीएम की पहल पर शुरू होने वाली योजना का वह सीधे विरोध नहीं कर पा रहे।

कुछ जिलाधिकारियों ने दूध की उपलब्धता न होने और व्यवस्था को बेहतर बनाने के सुझाव भेजे हैं। हम व्यवस्था बेहतर करने के साथ सुझावों पर भी विचार कर रहे हैं। 

-श्रद्धा मिश्रा, निदेशक, एमडीएम अथॉरिटी

बच्चों के स्वास्थ्य के लिए दूध बंटवाया जा रहा है। कुछ एनजीओ दूध नहीं उपलब्ध करा पा रहे पर व्यवस्था बेहतर करने के प्रयास हो रहे हैं। 

-राम गोविंद चौधरी, बेसिक शिक्षा मंत्री

सरकार को इस योजना पर पुनर्विचार करना चाहिए। पौष्टिक आहार देने की बात है तो मौसमी फल और अन्य विकल्प हो सकते हैं।

-विनय कुमार सिंह, अध्यक्ष प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन


        खबर साभार : नवभारतटाइम्स

सिर्फ पढ़ाई ही नहीं करा पा रहे परिषदीय विद्यालयों के ‘गुरूजी’ : हाशिए पर पढ़ाई , सर्वे करने के काम से फुर्सत मिले तो पढ़ाएं गुरूजी ; हाई कोर्ट का आदेश के बावजूद ड्यूटी करने को मजबूर

सिर्फ पढ़ाई ही नहीं करा पा रहे परिषदीय विद्यालयों के ‘गुरूजी’ : हाशिए पर पढ़ाई , सर्वे करने के काम से फुर्सत मिले तो पढ़ाएं गुरूजी ; हाई कोर्ट का आदेश के बावजूद ड्यूटी करने को मजबूर

लखनऊ : प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षक सरकारी ड्यूटी के बोझ तले इस कदर दबे हुए हैं कि उनके पास पढ़ाने की फुर्सत ही नहीं है। गणना करने का एक काम खत्म होता है कि दूसरा थमा दिया जाता है। यह हालत तब है जबकि हाई कोर्ट ने शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य न करवाने के आदेश दिए हैं। मगर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा, शिक्षक अब भी कई तरह की सरकारी गणना के काम में लगे हुए हैं। 

राजधानी में प्राथमिक शिक्षक संघ के मंत्री वीरेन्द्र सिंह कहते हैं कि स्कूलों में शिक्षकों से राशन कार्ड बनाने के लिए बीएलओ की ड्यूटी, पारिवारिक सर्वे, पिछड़ी जाति की गणना, बाल गणना व पंचायत वोटर लिस्ट बनाने की ड्यूटी लगातार एक के बाद एक करवाई जा रही है। यही नहीं हद तो तब हो गई जब लखनऊ में एक एनजीओ के लिए ग्लोबल ड्रीम सर्वे भी प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों से करवाया गया। इस ग्लोबल ड्रीम सर्वे में छह साल की उम्र के बच्चे से लेकर 70 वर्ष तक की आयु के बुजुर्गो की साक्षरता पर सर्वे किया गया। 

वीरेन्द्र सिंह कहते हैं कि हाई कोर्ट इलाहाबाद ने 25 मार्च 2015 को निर्देश दिया कि शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य न करवाए जाएं। वीरेन्द्र सिंह कहते हैं कि इसके बाद लखनऊ जिला प्रशासन ने शिक्षक संघ को ही धमका दिया कि यह आदेश तो इलाहाबाद के लिए है। ऐसे में ड्यूटी तो करनी ही होगी। जबकि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गैर शैक्षणिक ड्यूटी न करने का स्पष्ट आदेश दिया है। इसके बाद प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दायर हुई तो 8 जुलाई 2015 को कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर उनसे बड़ी कोर्ट पहले ही शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य न करने का आदेश दे चुकी है, ऐसे में वह कोई नया आदेश नहीं देंगे। अगर सरकारी अधिकारी उनसे ड्यूटी करवाते हैं तो वह कोर्ट में अवमानना का वाद या फिर राहत पाने के लिए अपना वाद दायर कर सकते हैं। 

इसके अलावा अब शिक्षा का अधिकार अधिनियम में भी साफ कर दिया गया है कि सर्वे का काम चुनाव से जुड़ा नहीं है। सिर्फ चुनाव से जुड़े काम ही शिक्षक करेंगे। पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष मिश्री लाल यादव कहते हैं कि अगर मांग न मानी गई तो हम मतदाता पुनरीक्षण कार्य व मतदाताओं को आधार से लिंकअप करने के काम का बहिष्कार करेंगे। इस बारे में जिलाधिकारी राजशेखर का कहना है कि वह इस मामले को गंभीरता से लेंगे और शिक्षकों से बात कर मामले का हल निकालेंगे। 

       खबर साभार : दैनिकजागरण

बच्चों ने स्कूल में दोबारा दूध ना पीने का किया फैसला, मिड डे मील भी नहीं खाया : दूध के खौफ ने बच्चों को स्कूल से किया दूर

बच्चों ने स्कूल में दोबारा दूध ना पीने का किया फैसला, मिड डे मील भी नहीं खाया : दूध के खौफ ने बच्चों को स्कूल से किया दूर

लखनऊ : कैंट क्षेत्र स्थित प्राथमिक विद्यालय आरए बाजार तोपखाना एवं बीसी बाजार में दूध पीने से बीमार हुए बच्चों में खौफ समा गया है। बुधवार को मिड डे मील के तहत उपलब्ध कराए गए दूध को पीने से बीमार हुए कुल 77 बच्चों में करीब 20 बच्चों ने ही गुरुवार को स्कूलों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। माध्यमिक विद्यालय आरए बाजार में गुरुवार को प्राथमिक के कुल 361 विद्यार्थियों में महज 70 बच्चे ही स्कूल पहुंचे। 

अक्षय पात्र संस्था की ओर से उपलब्ध कराये गये दूध को पीकर माध्यमिक विद्यालय आरए बाजार में कक्षा छह से आठवीं तक के करीब 27 बच्चे बुधवार को बीमार हो गए थे। इनमें गुरुवार को केवल 12 स्कूल आए। दूसरी ओर प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांचवीं में 40 बच्चे बीमार थे, जिनमें महज छह बच्चे स्कूल पहुंचे। वहीं बीसी बाजार स्थित स्कूल में बीमार हुए 10 बच्चों में महज दो उपस्थित स्कूल पहुंचे। माध्यमिक विद्यालय आरए बाजार में छानबीन के लिए गुरुवार सुबह सिटी मजिस्ट्रेट, खंड शिक्षा अधिकारी एवं कैंट के सीईओ स्कूल पहुंचे और बच्चों से बातचीत की। कक्षा छह की छात्र तन्नू ने बताया कि अधिकारियों ने उनसे पूछा कि बच्चों ने अपने मन से दूध पीया था या फिर उन्हें अध्यापकों ने पीने के लिए बोला था। इसपर उसने बताया कि सभी बच्चों ने खुद से दूध लेकर पी थी।

अब नहीं पियेंगे दूध :

बच्चों में दूध का खौफ इस कदर समाया है कि उन्होंने दोबारा दूध पीने से इंकार कर दिया। कक्षा सात की छात्र बेबी ने कहा कि अब वह स्कूल में दोबारा कभी दूध नहीं पियेंगी। वहीं कक्षा आठ की छात्र कोमल, कक्षा सात की जन्नत, गुनगुन एवं मोनी समेत अन्य छात्रओं ने मिड डे मिल में दिये जाने वाले दूध को दोबारा पीने से मना कर दिया। 

नहीं खाया मिड डे मिल :

स्कूल में गुरुवार को अक्षय पात्र की ओर से दिए गए मिड डे मील को छात्रों ने हाथ नहीं लगाया। बच्चों को खाने में राजमा और रोटी उपलब्ध कराई गई थी। प्रारंभ में 10 विद्यार्थियों ने खाना खाया, लेकिन अन्य बच्चों ने डर के कारण खाना खाने से इंकार कर दिया। वहीं शिक्षिकाओं का कहना है कि उन्होंने खाना चखा था। भोजन में कोई कमी नहीं थी।

स्कूल में पसरा सन्नाटा :

माध्यमिक व प्राथमिक विद्यालय आरए बाजार परिसर में गुरुवार को सन्नाटा पसरा हुआ था। बच्चे अपनी कक्षाओं में बेहद शांत भाव से बैठे हुए थे। बच्चों के चेहरे पर खौफ का भाव स्पष्ट रूप से देखा गया। बातचीत करने पर बच्चों ने बताया कि बुधवार को दूध से बीमार हुए बच्चों का हाल देखकर वह भी डर गए हैं।

          खबर साभार :  दैनिकजागरण

कैंट स्थित स्कूल में बीमार हुए 65 बच्चों में 19 ही पहुंचे

लखनऊ : कैंट स्थित तोपखाना बाजार में कैंटोनमेंट बोर्ड की ओर से संचालित माध्यमिक एवं प्राइमरी पाठशाला में बुधवार को मिड-डे-मील में दूध पीने के बाद 77 से अधिक बच्चे बीमार हो गए थे। घटना के बाद से दोनों स्कूलों के बच्चों में दहशत है। एमडीएम भेजने वाली संस्था अक्षय पात्र ने गुरुवार को सब्जी रोटी भेजी थी, लेकिन बच्चों ने खाने से इनकार कर दिया। शिक्षकों के समझाने में कुछ ही बच्चे मिड-डे-मील लेने को तैयार हुए। हालांकि, ज्यादातर बच्चे टिफिन लेकर आए थे। उधर, बीमार हुए 65 बच्चों में 19 ही स्कूल पहुंचे।

दूध पीने के बाद हुए बीमार : मिड-डे-मील में दिया गया दूध पीने के बाद बच्चों के बीमार होने के मामले की जांच करने गुरुवार को सिटी मैजिस्ट्रेट शत्रोहन वैश्य स्कूल पहुंचे। इस दौरान कैंट के सीईओ एवीएस रेड्डी भी मौजूद रहे। सिटी मैजिस्ट्रेट ने बताया कि प्रारंभिक जांच में दूध पीने से ही बीमार होने की बात सामने आ रही है। हालांकि अभी एफएसडीए की रिपोर्ट आना बाकी है।

पराग और अक्षय पात्र को नोटिस : जिला प्रशासन की ओर से गुरुवार को अक्षय पात्र के एजीएम सुनील मेहता और पराग के जीएम दिनेश कुमार सिंह समेत तीन प्रिंसिपल विभा रानी, शोभना और रामफेर को नोटिस जारी कर पूरे प्रकरण पर 1 अगस्त तक स्पष्टीकरण मांगा है। दोनों प्रिंसिपल ने जवाब दे दिया है। इसमें कहा गया है कि शिक्षकों ने दूध पीया था, लेकिन उन्हें कुछ नहीं हुआ। वहीं, एमडीएम वितरण के दौरान गुरुवार को अक्षय पात्र के क्वॉलिटी असेसमेंट सेल के दो अधिकारी भी मौजूद रहे। 

विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरना शुरू किया 

MDM के दूध से बच्चों के बीमार होने पर विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता चंद्रमोहन ने कहा है कि इतनी बड़ी योजना शिक्षकों के जिम्मे छोड़ दी गई है। भारी मात्रा में दूध का इंतजाम करने के चक्कर में स्कूलों में पढ़ाई बाधित हो रही है। इसमें दूध माफिया भी हावी हो गए हैं और सिंथेटिक दूध पिलाने की शिकायतें भी मिली हैं। यदि वास्तव में मुख्यमंत्री को बच्चों की सेहत का खयाल है तो इससे शिक्षकों को मुक्त करें। बच्चों की मां के खाते में दूध का पैसा भेज दिया जाए। अपना दल के प्रदेश प्रवक्ता आरबी सिंह पटेल ने कहा है कि बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। बच्चों के बीमार होने की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई हो। 

पूरे मामले की जांच चल रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में कुछ कहा जा सकता है। रही बात समय की तो उसका हर हाल में पालन कराया जाएगा। 

- प्रवीण मणि त्रिपाठी, बीएसए


शासनादेश दरकिनार, दूध-खाना एक साथ

सभी प्राथमिक और जूनियर स्कूलों में बुधवार को बच्चों को दूध देने में शासनादेश की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। कैंट स्थित विद्यालय में बच्चों के बीमार होने की एक वजह यह भी हो सकती है। नियमानुसार सुबह 8:30 पर दूध और 9:30 पर मिड-डे-मील देना चाहिए। हालांकि आने-जाने का खर्च बचाने के लिए अक्षय पात्र खेल करने में जुटी है। इसके तहत एमडीएम के साथ ही 9:30 बजे दूध दिया जा रहा है। मेडिकल एक्सपर्ट के मुताबिक दूध के तुरंत बाद खाने से भी तबियत खराब हो सकती है।

कनवर्जन कॉस्ट है मुद्दा : एमडीएम में प्राइमरी के बच्चे की कन्वर्जन कॉस्ट 3 रुपये 59 और जूनियर 5 रुपये 38 पैसे है। इतनी ही रकम में संस्था को एमडीएम और दूध दोनों देना है। यही कारण है कि अक्षय पात्र ने पहले दूध देने से इनकार कर दिया था। हालांकि दबाव के बाद दूध देना शुरू किया है।

         खबर साभार : नवभारतटाइम्स

कठघरे में अक्षयपात्र ,सांसत में अभिभावक : नौनिहालों को मिलने वाले भोजन को लेकर सवाल उठने लगे ; स्वचालित प्लांट में मिड-डे मील बनाने का दावा फेल

कठघरे में अक्षयपात्र ,सांसत में अभिभावक : नौनिहालों को मिलने वाले भोजन को लेकर सवाल उठने लगे ; स्वचालित प्लांट में मिड-डे मील बनाने का दावा फेल

लखनऊ : अक्षय पात्र फाउंडेशन के स्वचालित प्लांट में मिड डे मील बनाने का दावा फेल होता नजर आ रहा है। प्रदेश के बाहर स्कूलों में गुणवत्तायुक्त मिड डे मील की आपूर्ति की सब्जबाग दिखाने वाली संस्था स्कूल खुलने के पहले महीने में ही कठघरे में आकर खड़ी हो गई है।   

छावनी के आरए बाजार हाईस्कूल और बीसी बाजार प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को बुधवार को दूध पीने से बच्चे बीमार हो गए। संस्था की लापरवाही से 77 बच्चों की सेहत से साथ हुआ खिलवाड़ को लेकर संस्था पर उठ रहे सवाल कोई नए नहीं हैं। अभिभावक तो अब संस्था के मिड डे मील पर ही सवाल उठाने लगे हैं। छावनी के स्कूलों के पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों ने तो पहले भी संस्था के भोजन में छिपकली निकलने की शिकायत भी कैंट विधायक डॉ.रीता बहुगुणा जोशी से की थी। 

अभिभावकों का कहना है कि आर्थिक तंगी की वजह से सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने की विवशता अब उनके कलेजे के टुकड़ों की सेहत पर बन आई है। जानकारों की माने तो सरोजनीनगर स्थित संस्था के प्लांट में इन दिनों काम करने वाले कर्मचारियों की कमी है। स्थानीय निवासियों को नौकरी पर रखा था, लेकिन वेतन भुगतान में असंतोष के चलते कई लोगों ने नौकरी छोड़ दी। फिलहाल कारण जो भी हों, लेकिन नौनिहालों को मिलने वाले भोजन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। उधर, अक्षय पात्र फाउंडेशन के उप महाप्रबंधक सुनील मेहता से दूध वितरण की लापरवाही के बारे में पूछने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल फोन नहीं उठा। उनके नंबर पर मैसेज करने के बावजूद कोई जवाब नहीं आया। 

      खबर साभार : दैनिकजागरण

इस साल टीईटी के आसार नहीं : बीटीसी प्रवेश की वजह से फिलहाल किसी नई तारीख का प्रस्ताव नही

इस साल टीईटी के आसार नहीं : बीटीसी प्रवेश की वजह से फिलहाल किसी नई तारीख का प्रस्ताव नहीं

इलाहाबाद : राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अब इस साल होने के आसार कम ही रह गए हैं। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने अगस्त में इस परीक्षा को कराने का प्रस्ताव शासन को भेजा था लेकिन तब एनआइसी ने अपने हाथ खड़े कर दिए थे। कार्यालय से नया प्रस्ताव अब तक नहीं भेजा जा सका है और माना जा रहा है कि बीटीसी की प्रवेश प्रक्रिया को देखते हुए हाल-फिलहाल ऐसा करना संभव नहीं है। 

वैसे तो साल में दो बार राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने का निर्देश है लेकिन उत्तर प्रदेश में यह परीक्षा एक बार आयोजित करने में भी तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। परीक्षा नियामक कार्यालय ने इससे पहले जो प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था, उसमें 15 जून तक विज्ञापन जारी करने, जुलाई के प्रथम सप्ताह में ऑनलाइन आवेदन मांगने, अगस्त में परीक्षा कराने और 10 अक्टूबर तक परिणाम घोषित करने की तैयारी थी, लेकिन शासन ने इसे संशोधित करने के निर्देश दिए थे।

वजह यह थी कि सर्वर की व्यस्तता से राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआइसी) ने हाथ खड़े कर दिए थे। एनआइसी की वजह से ही परीक्षा नियामक को पूर्व में जुलाई में टीईटी कराने का प्रस्ताव भी रोकना पड़ा था। अब बीटीसी की प्रवेश प्रक्रिया परीक्षा नियामक कार्यालय की प्राथमिकता है और इसके 22 सितंबर तक जारी रहने के आसार हैं। इसके बाद नई तारीख पर विचार किया जा सकता है। 

एक दूसरा विकल्प यह है कि बीटीसी के प्रवेश के लिए आवेदन लिए जाने के बाद इसकी प्रक्रिया रोकी जाए। फिर टीईटी संपन्न कराकर फिर से बीटीसी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। परीक्षा नियामक कार्यालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार इस विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है और यदि इस पर अमल किया गया तो नवंबर में टीईटी कराने का एक और प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जा सकता है। 

   खबर साभार : दैनिकजागरण

कमजोर छात्रों को करना चाहिए फेल, स्कूल न आने वालों के लिए घर में ही हो शिक्षा की व्यवस्था : देश में स्कूली शिक्षा का एक बोर्ड व एक कोर्स हो, एससीईआरटी निदेशालय में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

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लखनऊ। देश की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति कैसी हो इस पर मंथन शुरू हो गया है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) निदेशालय में बृहस्पतिवार को आयोजित बैठक में विशेषज्ञों ने सुझाव दिए कि कमजोर छात्रों को फेल करने की व्यवस्था होनी चाहिए और मूल्यांकन के स्थान पर पहले की तरह अर्द्धवार्षिक व वार्षिक परीक्षा होनी चाहिए। कोई बच्चा स्कूल आने से यदि वंचित रह जाता है और आ पाने में सक्षम नहीं है तो उसे घर पर ही शिक्षा देने की व्यवस्था की जानी चाहिए।

विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया कि प्राइमरी में दो भाषा और उच्च प्राइमरी में तीन भाषाओं में पढ़ाई की व्यवस्था हो। अंग्रेजी को दूसरी भाषा के रूप में अनिवार्य किया जाना चाहिए ताकि परिषदीय स्कूलों के बच्चों का अंग्रेजी में ज्ञान बेहतर हो। साथ ही स्थानीय भाषा में भी बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था होनी चाहिए जिससे उन्हें आसानी से समझ में आ जाए। छात्राओं को पढ़ाने के लिए महिला शिक्षिकाओं की नियुक्ति होनी चाहिए। शिक्षकों को समय-समय पर यह प्रशिक्षण दिया जाए कि वे बच्चों को कैसे पढ़ाएंगे।

शिक्षकों का समय-समय पर टेस्ट लेने की व्यवस्था होनी चाहिए जिससे उनके ज्ञान का पता चल सके। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का अनिवार्य रूप से हेल्थ कार्ड बनाया जाना चाहिए। पूर्व की तरह रेड क्रास को फिर से जीवित करना भी ठीक रहेगा। बैठक में एससीईआरटी निदेशक सर्वेंद्र विक्रम सिंह, एनसीईआरटी की विशेषज्ञ सरोज के साथ शिक्षाविद, अभिभावक, शिक्षा अधिकारी समेत 140 लोग शामिल हुए। इनके कुल 11 ग्रुप बनाए गए। सभी ग्रुपों से कुल 20 सुझाव आए।

   खबर साभार : अमरउजाला/दैनिकजागरण

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